कानूनी सलाह

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    सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ़ कर दिया कि मज़दूरों की जहालत से उसे कोई मतलब नहीं

    By गौतम मोदी सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐसा फ़ैसला सुनाया है जिसके बकौल हमारे देश में मेहनतकश वर्ग कि ज़िन्दगी और उनकी रोज़ी-रोटी के लिए कोई जिम्मेदार ही नहीं हैं। 28 पन्नों वाला यह लम्बा-चौड़ा फ़ैसला जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि मालिक लॉकडाउन की अवधि के लिए मज़दूरी देने के लिए ज़िम्मेदार नहीं है वह न…

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  • Photo of उत्तरप्रदेश के मजदूरों की बड़ी जीत, काम के घंटे 12 करने का आदेश वापस

    उत्तरप्रदेश के मजदूरों की बड़ी जीत, काम के घंटे 12 करने का आदेश वापस

    By आशीष सक्सेना संविधान का उल्लंघन कर काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 करने का आदेश योगी सरकार को वापस लेना पड़ गया। इस सिलसिले में वर्कर्स फ्रंट की जनहित याचिका के बाद सरकार ने 15 मई को आदेश वापसी का पत्र जारी कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस…

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  • Photo of क्या अदालतों ने मज़दूरों के मामलों में आंखें और कान बंद कर लिए हैं?

    क्या अदालतों ने मज़दूरों के मामलों में आंखें और कान बंद कर लिए हैं?

    लॉकडाउन के बावजूद न्याय‌ प्रशासन को निलंबित नहीं किया जा सकता है। हालांकि, इन संख्याओं और कोर्टों की तकनीक-प्र‌ियता के बावजूद, हमें एक प्रासंगिक सवाल को पूछना नहीं भूलना नहीं चाहिए कि क्या अदालत ने कार्यकारिणी की जवाबदेही सुन‌िश्‍चित करने के अपने संवैधानिक दाय‌ित्व का पूर्ण निर्वहन किया? जब यह आलेख लिखा जा रहा था, उसी समय औरंगाबाद ट्रेन दुर्घटना…

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