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बास्तील दिवस पर फ्रांसीसी जनता ने हिला दिया मैंक्रों का ‘किला’, पुलिस से तीखी झड़प

लेबर यूनियन महासंघ के आह्वान पर सडक़ों पर उमड़ी प्रदर्शनकारी जनता, पूंजीवाद के नाश के नारे गूंजे

By आशीष आनंद

फ्रांस में आज राष्ट्रीय दिवस यानी बास्तील दिवस इतिहास घटनाक्रम के अंदाज में मनाया गया। भारतीय समयानुसार दोपहर बाद फ्रांसीसी जनता सडक़ों पर प्रदर्शन करने को उमड़ पड़ी, जब मैक्रों सरकार देश के वैभव प्रदर्शन में जुटी थी। पुलिस और जनता के बीच सडक़ पर तीखी झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोडक़र घेराबंदी की नाकाम कोशिश की।

लेबर यूनियन महासंघ के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी तादाद में वे स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हुए, जिनके सम्मान में सरकार सेना की परेड कराने वाली थी। आखिरकार परेड की औपचारिकता निभाने को रूट बदला गया और हवाई प्रदर्शन कर सरकार को तसल्ली करना पड़ी।

यलो वेस्ट मूवमेंट के समर्थक और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन का हिस्सा बने। प्रदर्शनकारियों ने पूंजीवादी व्यवस्था को निशाना बनाकर नारेबाजी कर बदलाव की हुंकार भरी।

यहां बता दें, इसी सप्ताह फ्रांस में कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें एक पेरिस में तब हुआ जब मैक्रों सरकार ने एक दुष्कर्म आरोपी को कैबिनेट में शामिल करने की घोषणा की। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों के प्रदर्शन जारी हैं, जो कोरोना वायरस की महामारी में जीजान से जुटने के बावजूद सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं।

उनकी मांग हैं कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधाओं और वेतन में इजाफा किया जाए, साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत बनाने को सरकार विशेष बजट की घोषणा करे। यहां कि एक बार प्रदर्शनकारी स्वास्थ्य मंत्रालय को लाल रंग से पोतकर अपना गुस्सा जाहिर कर चुके हैं।

बास्तील दिवस की घटना क्या थी

फ्रांस में 1789 में दुनिया की पहली जनवादी क्रांति हुई, जिसने सामंती सत्ता और राजशाही को दफन कर दिया। क्रांतिकारी जनता और सामंती शासकों के बीच जब तीखा संघर्ष जारी था, तभी सूचना मिली कि बास्तील के किले में राजा लुई 16वें ने बास्तील किले में क्रांति को कुचलने के लिए शस्त्र जमा कर रखे हैं।

इसके बाद क्रांतिकारी जनता ने किले पर धावा बोलकर दरवाजा तोड़ दिया और कैदियों को मुक्त कर दिया। ये घटना 14 जुलाई 1789 को हुई, जिसे क्रांति का उद्घोष माना गया, इस दिन को फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस का दर्जा मिला।

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