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आक्रोशित अमेरिकी जनता के खौफ से बंकर में छुपे ट्रंप, पुलिस ने घुटने टेके

कोरोना काल में अमेरिका में नस्लभेद के आधार पर श्वेत पुलिसकर्मी के हाथों अश्वेत की हत्या पर उबाल

By आशीष सक्सेना

लेबनान और हांगकांग के बाद अब अमेरिका। ताजा हालात ये हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस छोड़कर बंकर में दुबकने को मजबूर हो गए और यहां की नस्लवादी पुलिस भी घुटने पर आ गई, जब जनता के तेवर तल्ख हुए और उन्होंने आजादी-सम्मान की खातिर गमो-गुस्से का गुबार निकाला।

बुझानी पड़ी व्हाइट हाउस की बत्ती
अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है और 23 राज्यों के 40 शहरों में कफ्र्यू लगा दिया गया है। अमेरिकी सत्ता की नाक कहे जाने वाले वाशिंगटन डीसी में ‘व्हाइट हाउस’ की चमकती इमारत काले धुएं के गुबार और लपटों से कांप रही है। बरसों तक दुनिया में अपनी धौंस जमाने वाली इस इमारत की बत्ती बुझाने तक की नौबत आ गई, जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने उसे घेर लिया।

जनता ने निकाली अमेरिकी हुक्मरानों की हेकड़ी
कोरोना काल में ये ऐतिहासिक घटनाक्रम हैं। उस अमेरिका में जहां कुछ अरसे पहले ‘अमेरिका फस्र्ट’ के राष्ट्रवादी नारे के साथ सत्ता में आए राष्ट्रपति ट्रंप को जनता से इस तरह सामना करना पड़ रहा है। उस अमेरिका में, जिसके हुक्मरानों की चौधराहट दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कम तो हुई, लेकिन हेकड़ी और साम्राज्यवादी साजिशों से पूरी दुनिया तंग आ गई।

उस अमेरिका में, जिसने मजदूरों की सत्ताओं के साथ हमेशा दुश्मनी निभाई और उनको ध्वस्त करने को ताकत झोंक दी। उस अमेरिका में, जहां के हथियार और बारूद पूरी दुनिया को खून में डुबाने पर आमादा रहते हैं। इस कमान को थामने फासीवादी शासकों को वहां की न्यायप्रिय जनता ने सबक सिखाना शुरू कर दिया है।

पुलिस की हिंसा से भड़के प्रदर्शनकारी
जॉर्ज फ्लॉयड नाम के अश्वेत नागरिक की श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक शैविन ने निर्मम हत्या की तो पूरा अमेरिका उबल पड़ा। शुरुआत में प्रदर्शन सिर्फ इंसाफ मांगने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ, लेकिन जब पुलिस ने हिंसात्सक तरीके से प्रदर्शनकारियों का दमन शुरू किया तो दूसरी ओर से भी वैसी ही प्रतिक्रिया मिलन शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन वाली कई जगहों पर न्यूयॉर्क सिटी पुलिस विरोध कर रही भीड़ पर गाड़ी चढ़ा दी, जिसके बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यूयॉर्क पुलिस का समर्थन कर आग में घी डालने का काम कर दिया।

ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ी नफरत और भेदभाव
जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन घुटने से दबाकर मौत के घाट उतारने वाले पुलिस अधिकारी पर हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी जनता शांत नहीं हो रही। इसकी बड़ी वजह ट्रंप प्रशासन का रवैया और उसका नस्लवादी होकर दक्षिणपंथी रुख बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ने इस बवाल के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है।मेयर का कहना है कि ट्रंप के शासनकाल में नफरत, लोगों के बीच तनाव और भेदभाव बढ़ा है। कहा जा रहा कि आरोपी पुलिस अधिकारी की पत्नी भी पति की क्रूर और नस्लवादी मानसिकता से इतना आहत हो गई कि तलाक दे रही है।

गोदी मीडिया पर भी उतारा गुस्सा

साम्राज्यवादी मंसबों के खुले पैरोकार दक्षिणपंथी विचारधारा वाले ट्रंप आने के बाद यहां की कारोबारी मीडिया भी जनता के खिलाफ जहर बोती रही है। अब जब नागरिकों का गुस्सा फूटा तो उसकी आंच से वे भी झुलस रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रदर्शन की निगेटिव कवरेज करने वाली फॉक्स न्यूज की टीम को प्रदर्शनकारियों ने भगा दिया। इसके अलावा अटलांटा में सीएनएन के हेडक्वार्टर में भी तोडफ़ोड़ हुई।

इस वजह से शुरू हुआ प्रदर्शन
मामले की शुरुआत 20 डॉलर के जाली नोट के इस्तेमाल की रिपोर्ट से हुई। मीडिया में आई खबरों के अनुसार 25 मई की शाम जॉर्ज ने एक किराने की दुकान से सिगरेट खरीदी। दुकान में मौजूद स्टाफ को लगा कि जॉर्ज जाली नोट दे रहे हैं और उन्होंने पुलिस को फोन पर इसकी सूचना दे दी।

कॉल के कुछ ही देर के बाद दो पुलिस वाले वहां पहुंच गए। जॉर्ज दो अन्य लोगों के साथ किनारे खड़ी गाड़ी में बैठे थे।हालांकि कुछ खबरों में ये भी बताया जा रहा है कि जॉर्ज खाना खा रहे थे और पुलिस ने सीधे उन्हीं को जाकर दबोचा।

वहीं कुछ खबरों में बताया जा रहा है कि पुलिस के अनुसार एक पुलिस अधिकारी थॉमस लेन ने कार की ओर बढ़ते हुए अपनी बंदूक निकाल ली और जॉर्ज को हाथ खड़ा करने को कहा। बंदूक निकालने की वजह पुलिस नहीं बता सकी है।

बहरहाल, इसके बाद थॉमस लेन ने जॉर्ज का हाथ पकड़कर उन्हें कार से बाहर खींचा था और फ्लॉयड हथकड़ी लगाए जाने का विरोध कर रहे थे और छोडऩे को मिन्नतें कर रहे थे।

तभी, वहां पुलिस अधिकारी डेरेक शैविन पहुंचा और जॉर्ज को पुलिस कार में बैठाने की कोशिश के दौरान क्रूरता पर उतर आया। इसी दौरान डेरेक ने जॉर्ज की गर्दन पर बाएं पैर का घुटना टिका दिया और बाकी पुलिसकर्मी जॉर्ज को पकड़े रहे।

मुंह के बल गिरे हुए हथकड़ी लगे जॉर्ज तड़पने लगे। जॉर्ज कह रहे थे, ‘मुझे सांस नहीं आ रही है’। निढाल होते हुए जॉर्ज मां का वास्ता दे रहे थे और ख़ुद को छोडऩे की गुहार लगा रहे थे। इसी दौरान कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।

जिस किराने की दुकान का मामला बताया जा रहा है, वहां के मालिक माइक अबुमाएला ने कहा है कि जॉर्ज अक्सर वहां आया करते थे। लेकिन घटना वाले दिन दुकान पर नहीं आए थे और स्टाफ दुकान पर था। दुकान मालिक ने ये भी कहा है कि जॉर्ज ने कभी भी कोई परेशानी पैदा नहीं की थी।

बताया जा रहा है कि दो बेटियों के पिता 46 वर्षीय जॉर्ज टेक्सास के हाउसटन से बरसों पहले मिनेसोटा के मिनीपोलिस आ गए थे। वो यहां एक दरबान के तौर पर काम कर रहे थे लेकिन कोरोना महामारी के कारण तमाम लोगों की तरह उनकी भी नौकरी चली गई थी।

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