KARNATAKA HIGH COURT: AICCTU ने दायर किया ज्ञापन, लॉकडाउन में मजदूरों को वेतन देने से लेकर राशन किट उपलब्ध कराने की कही बात

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ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU) ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट के सामने एक ज्ञापन दायर किया है। इस ज्ञापन में मंगलवार रात 9 बजे से 14 दिनों के लॉकडाउन के चलते समाज के बड़े वर्गों, विशेषकर असंगठित मजदूरों के भोजन, आजीविका और आर्थिक सुरक्षा पर पड़ने वाले गंभीर असर को उठाया गया है।

वकील क्लिफ्टन रोजारियो द्वारा दायर किए गए ज्ञापन में कहा गया है, ”प्यू इंस्टीट्यूट के एक शोध के अनुसार 2020 के लॉकडाउन के बाद गरीब लोगों की संख्या 7.5 करोड़ तक बढ़ गई है। यह आशंका है कि इस लॉकडाउन से स्थिति और भी विकट हो जाएगी और लोगों को अपने आजीविका, शिक्षा, भोजन और आश्रय के रहने के अधिकार से समझौता करना पड़ेगा। इसके अलावा वे बचे हुए कर्ज को चुकाने में असमर्थ होंगे साथ ही और कर्ज मांगने के लिए मजबूर होंगे।”

ज्ञापन में आगे कहा गया है, ”यह याद रखना जरूरी है कि करीब पूरे साल तक सरकारी स्कूल और कॉलेजों के बच्चों के ऑनलाइन या ऑफलाइन कोई भी क्लॉस नहीं हुए।” ज्ञापन में यह बात भी कही गई है कि राज्य सरकार और उसके विभागों को कमजोर समूहों पर खास ध्यान देने की जरूरत है जिसमें छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर, वृक्षारोपण मजदूर, आकस्मिक मजदूर, घरेलू मजदूर, सड़क के दुकानदार, प्रवासी मजदूर, कपड़ा मजदूर, निर्माण मजूदर और अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का एक बड़ा हिस्सा साथ ही बेघर लोग, वरिष्ठ नागरिक, झुग्गी-झोपड़ी वाले, विकलांग लोग, विधवाएं, अनाथ, हाल के बाढ़ और सूखे जैसे प्राकृतिक आपदा में बेसहारा हुए लोग, अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोग, आदि शुमार हैं।

ज्ञापन में लिखा है, “सरकारों पर एक अतिरिक्त भार यह सुनिश्चित करने का है कि कमजोर आबादी को आपातकालीन भोजन, मौद्रिक राहत और चिकित्सा सहायता प्राप्त हो। अनुच्छेद 21 जिंदगी, रोजी-रोटी, आपातकालीन भोजन, मौद्रिक राहत और चिकित्सा सहायता के मौलिक अधिकार की रक्षा करता है।”

इसके अलावा यह कहा जाता है कि धारा 30 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत केन्द्र और राज्य सरकारों को अनिवार्य रूप से कमजोर वर्ग के खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उनकी जरूरतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

ज्ञापन में निम्नलिखित मुख्य बिंदु भी उठाये गए- 

1.राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए कि खाद्य असुरक्षा से पीड़ित सभी लोगों को राशन किट उपलब्ध कराने की घोषणा करे।

2. MHA के आदेश दिनांक 29.03.2020 की तर्ज पर राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वे नियोक्ताओं को आदेश जारी करे कि प्रतिष्ठान बंद होने की अवधि के दौरान वे कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करे।

3.MHA के आदेश दिनांक 29.03.2020 की तर्ज पर राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह आदेश जारी करे कि एक महीने के लिए किराया नहीं लिया जाएगा और अगर कोई जबरन किराएदार को निकालता है तो उस पर कार्रवाही हो सकती है।

4. एडवाजरी दिनांक 20.03.2020 की तर्ज पर राज्य सरकार को यह निर्देश दिया जाए कि वह प्रतिष्ठानों के नियोक्ताओं/मालिकों को यह आदेश जारी करे कि वे कर्मचारियों को न निकाले, खास तौर पर आकस्मिक और संविदात्मक या उनकी मजदूरी कम न करे।

5. राज्य सरकार को यह निर्देश दे कि लॉकडाउन की अवधि में जिन मजदूरों को अपनी मजदूरी नहीं मिल रही है उनकी सहायता के लिए मजदूर विभाग से एक अलग हेल्पलाइन स्थापित करवाए।

6.जो किराएदार किराए को लेकर मकान मालिक से समस्याओं का सामना कर रहे हैं उन किराएदारों की सहायता के लिए एक अलग हेल्पलाइन स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए।

7.राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए कि वह सभी किसानों और सभी वर्गों के मजदूरों के लिए मुआवजा पैकेज की घोषणा करे।

मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की खंडपीठ ने कहा कि वे ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेंगे। हालांकि, एडवोकेट जनरल को निर्देश दिया गया कि वे इस समूह की याचिकाओं में उपस्थित वकीलों की एक बैठक बुलाएं और वे उनसे उनकी शिकायतों को समझेंगे, न सिर्फ (बेड की उपलब्धता, रेमेडिसविर और ऑक्सीजन) बल्कि खाद्य सुरक्षा और टीकाकरण समेत सभी पहलूओं को भी समझेंगे।

”लाइव लॉ” से साभार

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