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पुलिस ने मारे गए आदिवासी के नाबालिग बच्चों को ही भेज दिया जेल

एआईपीएफ और स्वराज अभियान कार्यकर्ताओं ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी शिकायत

उत्तरप्रदेश में सोनभद्र के पकरी गांव निवासी रामसुंदर गोंड की हत्या मामले में पुलिस पीडि़तों को ही निशाना बना रही है। पुलिस ने रामसुंदर गोंड के दो नाबालिग बच्चों को ही जेल भेज दिया। ये आरोप लगाकर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट व स्वराज अभियान के कायकर्ताओं ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शिकायत भेजी है।

स्वराज अभियान के नेता दिनकर कपूर ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पत्र भेज हस्तक्षेप करने व पुलिस की भूमिका की जांच करने की मांग की है। शिकायत में कहा है कि रामसुंदर गोंड की हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करने वाले ग्राम प्रधान और मृतक रामसुंदर के परिजनों पर ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी।

इस एफआईआर मेंं मृतक आदिवासी रामसुंदर गोंड के तीनों बेटे और उनकी पत्नियों के अलावा और नाबालिग बच्चियां व बच्चे भी हैं। आरोप है कि खनन माफिया के दबाव में पुलिस एफआईआर में दर्ज सभी लोगों को जेल में डालने की कोशिश कर रही है।

इस मामले में मृतक आदिवासी रामसुंदर गोंड के14 वर्षीय व 12 वर्षीय दो बेटों को मनमाने तरीके से बालिग दर्ज कर जेल भेज दिया है, जबकि आधार कार्ड समेत तमाम दस्तावेज में वे नाबालिग ही हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अगर पुलिस उन्हें आरोपी मानती है तो भी उनको बाल सुधार गृह भेजा जाना चाहिए। ऐसा न करके बाल अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

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