Punjab Farmer

जब आप सो रहे हों एक आंख ज़रूर खुली रहनी चाहिए – ओचो ओबुरु की 10 कविताएं

युगांडा के प्रमुख कवि सोलोमन ओचो-ओबुरु की 10 छोटी कविताएं। (1) जब आप सो रहे हों जब आप सो रहे हों एक आंख ज़रूर जगी होनी चाहिये क्योंकि जब ख़तरा …

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एक पीर ने बद्दुआ दी थी- हिंदुस्तान पर हमेशा बाहरी राज करेंगे- मंटो की कहानी ‘नया क़ानून’

-सआदत हसन मंटो मंगू कोचवान अपने अड्डे में बहुत अकलमन्द आदमी समझा जाता था, हालाँकि उसकी तालीमी हैसियत सिफर के बराबर थी और उसने कभी स्कूल का मुंह भी नहीं …

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एक रसूख़दार की मौत

किसी भी रसूख़दार व्यक्ति की मौत बन जाती है अख़बारों की सुर्ख़ियाँ भावुक हो उठते हैं टीवी ऐंकर गमगीन हो उठता है पूरा समाज फ़र्क़ नहीं पड़ता है उसके कारनामों …

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Arundhati Roy

एक राष्ट्र के लोगों को गुलाम बनाने के लिए तानाशाह क्या करते हैं? मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय की किताब का बेहतरीन अंश

By अरुंधति रॉय किसी जानवर की चाल धीमी करने के लिए आप उसके अंग तोड़ देते हैं। एक राष्ट्र को धीमा करने के लिए आप उसके अंगों को तोड़ देते …

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maruti historic struggle

‘द फ़ैक्ट्री’ फ़िल्म दिखाती है, श्रम क़ानूनों को कांग्रेस ने रद्दी बना दिया था, बीजेपी ने उसे बस जामा पहनाया है

By अजीत सैनी मोदी सरकार ने भले ही अब जाकर यूनियन बनाने, हड़ताल पर जाने, मज़दूरों के सारे अधिकार छीनने वाले क़ानून बनाए हों लेकिन ये प्रैक्टिस में सालों पहले …

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hayan charara

“मैं हूं एक अमरीकी, मैं एपल पाई खाता हूं, मैं बेसबॉल देखता हूं” – हयान चरारा की कविता

अरबी-अमरीकी कवि हयान चरारा की परवरिश मिशिगन डेट्रायट में हुई है। उनका परिवार लेबनान से आकर अमरीका में बसा था। उनकी शिक्षा दीक्षा न्यूयार्क यूनिवर्सिटी में हुई है। वेन स्टेट …

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sophie scholl the final days

सोफ़ी शोल- द फ़ाइनल डेज़: हिटलर के कुकृत्यों का पर्दाफ़ाश करने वाली छात्रा की कहानी

By एस. असीम जर्मन नाजियों ने करोड़ों की तादाद मेंयहूदियों, जिप्सीयों, स्लावों, आदि का जनसंहार तो किया ही था, 1933 से 1945 के दौरान हिटलर के फासिस्ट शासन का प्रतिरोध …

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salt of earth Film

मज़दूरों पर बनी फ़िल्म ‘साल्ट आफ द अर्थ’ में ऐसा क्या था कि अमेरिकी सरकार ने बैन लगा दिया?

By मनीष आज़ाद ‘साल्ट आफ द अर्थ’ 1953 में बनी एक बेहतरीन फ़िल्म है। बनने के लगभग 7-8 साल बाद तक यह थियेटर का मुंह नहीं देख सकी थी। अमरीकी …

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maruti struggle

मारुति आंदोलन पर बनी फ़िल्म ‘फ़ैक्ट्री’ दिखाती है कि लड़ना ही एकमात्र रास्ता है

By सौरभ कुमार  सनं 2012 में हरियाणा के मानेसर की मारुति सुजुकी फैक्ट्री के भीतर श्रमिकों और प्रबंधन के बीच के तनाव ने तब एक दुखद मोड़ लिया जब एक …

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10 जुलाई से आशा वर्कर्स हैं हड़ताल पर, वेतन 4000 से बढ़कार 12,000 हज़ार करने की कर रही हैं मांग

वेतन बढ़ोत्तरी को लेकर आशा वर्कर्स शुक्रवार से हड़ताल पर हैं। आशा वर्कर्स की मांग है कि सरकार उनका वेतन 4,000 हज़ार से बढ़ाकर 12,000 हज़ार करे। साथ ही 22 …

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