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गृह मंत्रियों का चिंतन शिविरः पूरे भारत को पुलिस राज में बदने की कोशिश- नज़रिया

By पी जे जेम्स केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 27 और 28 अक्टूबर को फरीदाबाद में राज्यों के गृह मंत्रियों का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ (विचार-मंथन सत्र) …

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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़: वो शायर जिनकी नज़्मों से आज के तानाशाह भी कांपते हैं…

By मनीष आज़ाद (भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे रूमानी और क्रांतिकारी शायरों में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911-1984) दर्जा सबसे ऊंचा है। एक ऐसा शायर जिसे जितनी शिद्दत से पाकिस्तान में याद …

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‘हिमालय दलित है’ : उत्तराखण्ड के जातिगत अन्तरविरोधों को उजागर करता काव्य संग्रह 

By चन्द्रकला पहाड़ के सामाजिक व सांस्कृतिक यर्थाथ को बयां करती युवा कवि मोहन मुक्त की हाल में प्रकाशित पुस्तक है ‘हिमालय दलित है’। इसमें संग्रहित कविताएं उत्तराखण्डी समाज में ही …

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एक ज़रूरी फ़िल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ हैवेन’; मासूमियत की खुशबू के 25 साल

By मनीष आजाद बच्चों की मासूम दुनिया को ध्वस्त करके ही हम बड़ों की ‘समझदार’ दुनिया बनी है। लेकिन अक्सर ही हम इस ‘समझदारी’ से इतना ऊब जाते हैं कि …

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एक ज़रूरी फ़िल्म Mephisto: एक कलाकार जिसने अपनी आत्मा नाज़ियों को बेच दी

By मनीष आज़ाद जर्मन फासीवाद पर वैसे तो कई बेहतरीन फिल्में हैं, लेकिन 1981 में आयी यह फिल्म एकदम अलग तरह की है! ‘हेन्डरिक’ एक स्टेज कलाकार है। वह आम …

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‘द जर्नी ऑफ़ फार्मर्स रिबेलियन’ किताब का चंडीगढ़ में विमोचनः एक रिपोर्ट

ऐतिहासिक किसान आंदोलन पर आधारित ‘द जर्नी ऑफ़ फार्मर्स रिबेलियन’ किताब का दिल्ली में विमोचन के बाद 24 सितम्बर को चंडीगढ़ में विमोचन किया गया। इसे एएफडीआर ने आयोजित किया …

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मट्टो की साइकिलः यह फिल्म हर मज़दूर को क्यों देखनी चाहिए?

By आशुतोष कुमार साइकिल मेरी प्रिय सवारी है। अलीगढ़ के शुरुआती सालों में साइकिल के सहारे ही सारा शहर धांगता फिरता था। यह कोई दो दशक पहले की बात है। …

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‘गायब होता देश’ और ‘एक्सटरमिनेट आल द ब्रूटस’ : एक ज़रूरी उपन्यास और डाक्युमेंट्री

By मनीष आज़ाद कुछ किताबें और फिल्में ऐसी होती हैं, जहाँ समय सांस लेता है। यहां सांस के उतार-चढ़ाव और गर्माहट को आप महसूस कर सकते हैं। रणेन्द्र का ‘गायब …

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मराठी के जनकवि लोकशाहीर अन्ना भाऊ साठे जिन्हें महाराष्ट्र का गोर्की कहा गया

By  सुबोध मोरे (दो साल पहले क्रांतिकारी लोकशाहीर अन्नाभाऊ साठे की जन्मशताब्दी पर उनके जीवन और योगदानों को याद करते हुए वरिष्ठ सांस्कृतिक कार्यकर्ता सुबोध मोरे द्वारा लिखी गयी एक …

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