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होंडा समझौताः जानिए कितने साल की नौकरी के एवज में किसको कितना मिलेगा

10 साल तक काम करने वालों को लगभग सवा चार लाख रुपये मिलेंगे

चार महीने बाद होंडा मानेसर के कैजुअल मज़दूरों का तीन मार्च को समझौता हो गया।

कंपनी प्रबंधन ने मज़दूरों की बहुत सी मांगें मानने से इनकार कर दिया लेकिन शुरुआत में प्रति वर्ष सेवा के लिए 15000 रुपये मुआवज़ा देने की बात कही थी जिसे 23,000 रुपये तक बढ़ा दिया है।

चूंकि अधिकांश मज़दूर सालों से कंपनी में कैजुअल वर्कर के रूप में काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें प्रति वर्ष सेवा के हिसाब से फाइनल सेटलमेंट दिया जाएगा।

होंडा के परमानेंट ट्रेड यूनियन के प्रधान अशोक यादव के अनुसार निकाले गए 2458 कैजुअल मज़दूरों को तीन महीने की सैलरी भी देने पर समहति बनी है।

आईए जानते हैं कितने साल की नौकरी के एवज में किसको कितना मिलेगा।

पैसे का हिसाब
  1. -चार दिन का वेतन दिया जाएगा। क्लीयरेंस के मद में छुट्टी का पैसा मिलेगा।
  2. पांच साल की नौकरी पूरा करने वाले मज़दूरों को ग्रैच्युटी दी जाएगी।  यानी बेसिक सैलरी 9600 रुपये का आधा गुणे साल। यानी, 9600/2= 4800 रुपये। 4800 x (साल) = ग्रैच्युटी में मिलने वाला पूरा पैसा।
  3. तीन महीने का नोटिस पीरियड (पेड) – 14200×3= 42,600 रुपये
  4. एक्सग्रैशिया- 23,000x(जितने साल काम किया)
  5. साल के बाद जो महीने बचते हैं, वो पैसा भी मिलेगा।
  6. वर्षों की गणना ज्वाइन करने से लेकर अंतिम
honda full and final settlement @Workersunity
समझौते की प्रमुख बातें

समझौते के अनुसार प्रति वर्ष सेवा के लिए 23,000 रु. पर सहमति और तीन महीने की पेड लीव और ग्रेच्युटी पीएफ़ आदि। यानी प्रति वर्ष सेवा के हिसाब से कुल 43,000 रु. मिलेंगे।

पहले 15000 रु. या कुल 35,000 रु. सालाना मुआवज़ा दे रही थी कंपनी। छंटनी की स्थिति में कंपनी से वाज़िब मुआवज़े की थी मांग जबकि कैजुअल मज़दूर स्थाई नौकरी की मांग कर रहे हैं।

समझौते में साफ़ लिखा है कि धरने पर बैठे एक भी मज़दूर को वापस नहीं लेगी कंपनी। सारे मुकदमे और लेबर कोर्ट के मामले हटा लिए जाएंगे।

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