संघर्ष

डाइकिन यूनियन रजिस्ट्रेशन ख़ारिज़ कराने के प्रबंधन के तिकड़म पर हाइकोर्ट का स्टे

राजस्थान के अलवर में लंबे संघर्षो के बाद डाइकिन यूनियन नीमराना का रजिस्ट्रेशन हुआ था।

अब इसे कैंसिल करवाने के लिए मैनेजमेंट हर हथकंडे अख़्तियार करने पर लग गया।

डाइकिन यूनियन ने राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर में याचिका दायर की और शुक्रवार को अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए डाइकिन यूनियन के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने पर रोक लगा दी।

इस आदेश के बाद अब यूनियन के रजिस्ट्रेशन को कैंसिल नहीं किया जा सकता है।

ये भी पढ़ेंः डाइकिन यूनियन को मान्यता मिल गई, लेकिन पुलिस ने झंडारोहण नहीं होने दिया

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काफ़ी संघर्षों के बाद यूनियन का गठन हो पाया था।

 

गौरतलब है कि औद्योगिक क्षेत्र अलवर में सभी फैक्ट्रियों का यह ट्रेंड बन चुका था कि श्रमिकों द्वारा यूनियन रजिस्ट्रेशन के लिए लगाई गई फाइल को कोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) लेकर कैंसिल करा देते थे।

यहाँ तक कि यूनियन का रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी स्टे लाकर उसकी क़ानूनी वैधता ही खत्म कर दी जाती थी।

होंडा, डाइकिन और श्रीराम पिस्टन में ऐसा ही हुआ था। ऐसे में यह जीत अहम है।

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झंडारोहण के कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने सीधे सीधे यूनियन प्रतिनिधियों को धमकाया तक था।

हालांकि डाइकिन का मैनेजमेंट पहले तो यूनियन का रजिस्ट्रेशन किसी भी हालत में नहीं होने देना चाहता था।

बाद में जब रजिस्ट्रेशन हो गया तो यूनियन को कंपनी गेट पर झंडारोहण नहीं करने दिया गया।

इसके लिए पुलिस प्रशासन की मदद ली गई। और अखिरी दांव था कोर्ट का स्थगन आदेश लाना।

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