संघर्ष

समाचार एजेंसी PTI में छंटनी, 300 गैर-पत्रकारों को निकाल बाहर किया, यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

भारत की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्‍ट ऑफ इंडिया (पीटीआइ) ने 29 सितंबर को एक आंतरिक सर्कुलर जारी कर के 300 कर्मचारियों को तत्‍काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है। निकाले गए लोगों की सूची में करीब 50 कर्मचारी अकेले दिल्‍ली से हैं।

फ़ेडरेशन ऑफ़ पीटीआई एम्प्लाईज़ यूनियन ने बयान जारी कर इस छंटनी को ग़ैरक़ानूनी बताया है और इसे तुरंत रद्द किए जाने की मांग की है।

हालांकि अभी साफ नहीं है कि क्या यूनियन मैनेजमेंट के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देगा या नहीं।

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पीटीआई मैनेजमेंट की नोटिस

लेकिन यूनियन ने एक अक्तूबर से कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने का आह्वान किया है।

पीटीआइ के मुख्‍य प्रशासनिक अधिकारी एमआर मिश्रा द्वारा जारी सूचना के मुताबिक, प्रत्‍येक कर्मचारी को रजिस्‍टर्ड डाक से बरखास्‍तगी का पत्र भेज दिया गया है और उस पत्र में दी गई राशि को उनके बैंक खाते में जमा करवा दिया गया है।

शनिवार का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि ज़्यादातर लोग छुट्टी पर रहते हैं। आज ही पीटीआई बोर्ड की बैठक भी बुलाई गई है।

यह आधिकारिक सूचना दफ्तर में चस्पा कर दी गई है।

पीटीआई ने यह सूचना अपनी वेबसाइट पर डाल दी है। निकाले गए लोगों की नौकरी की कीमत पीटीआई में दी गई सेवा अवधि की आधी तनख्वाह लगाई गई है।

एक महीने के नोटिस पीरियड की तनख्वाह दी गई है औऱ नोटिस में लिखा है कि अगर कंपनी को कुछ लेना हुआ तो ग्रेच्युटी में एडजस्ट कर लिया जाएगा और ग्रेच्युटी तथा भविष्य निधि के पैसे निकालने के लिए फॉर्म भरने के लिए कहा गया है।

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पीटीआई एम्प्लाईज़ यूनियन ने बयान जारी कर मैनेजमेंट के इस कदम को ग़ैरक़ानूनी ठहराया है।

निकाले गए ज्यादातर लोग अटेंडर (ग्रुप पांच) के हैं।

कुछेक सीनियर / जूनियर टेक्निशियन, इंजीनियर, रीजनल इंजीनियर भी हैं। कोलकाता में छह लोगों को निकाला गया है इनमें जूनियर टेक्निशियन, सीनियर टेक्निशियन, तीन इंजीनियर और रीजनल इंजीनियर हैं। लखनऊ में चारो इंजीनियर हैं।

मुंबई में 10 लोगों में इंजीनियर, रीजनल इंजीनियर और सीनियर रीजनल इंजीनियर हैं ।

सबसे ज्यादा, 26 लोग दिल्ली केंद्र से निकाले गए हैं। इनमें जूनियर टेक्निशियन से लेकर रीजनल इंजीनियर सब शामिल हैं।

कई केंद्रो से ट्रांसमिशन सुपरवाइजर भी बड़ी संख्या में निकाले गए है। मुंबई में ट्रांसमिशन इंचार्ज, सपरवाइजर जैसे 14 लोग निकाले गए हैं।

नई दिल्ली की एक और सूची में 24 ट्रांसमिशन इंचार्ज और सुपरवाइजर हैं। इनमें 1978 से लेकर 1992 तक में नौकरी शुरू करने वाले लोग हैं। यानी दिल्ली में फ़िलहाल की सूचना के मुताबिक कुल 50 लोग निकाले गए हैं।

(समाचार वेबसाइट मीडिया विजिल से साभार)

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