14 घंटे का काम ,न उचित मुआवज़ा – गिग वर्कर्स पर अध्ययन

14 घंटे का काम ,न उचित मुआवज़ा – गिग वर्कर्स पर अध्ययन

लगभग 10,000 गिग वर्कर्स पर किये गए एक सर्वे के मुताबिक 83% एप्प -आधारित कैब ड्राइवर दिन में 10 घंटे से अधिक काम करते हैं, जबकि लगभग एक तिहाई ड्राइवर 14 घंटे से अधिक काम करते है.

ये सर्वे पीपुल्स एसोसिएशन इन ग्रासरूट्स एंड मूवमेंट्स और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स द्वारा द्वारा आयोजित किया गया था. अध्ययन बताता है कि 14 घंटे काम करने वाले इन ड्राइवर्स में 16 अनरिजर्व्ड केटेगरी से है जबकि 60% ड्राइवर अनुसूचित जाति और जनजाति से आते है.

आठ शहरों में 5,302 कैब ड्राइवरों और 5,028 डिलीवरी व्यक्तियों को शामिल करने वाले इस अध्ययन में कई और भी डरावने तथ्य सामने आये है.

वित्तीय संघर्ष

43% से अधिक प्रतिभागी सभी लागतों में कटौती करने के बाद प्रति दिन 500 रुपये से कम या प्रति माह 15,000 रुपये कमाते हैं.

लगभग 34% एप्प -आधारित डिलीवरी कार्यकर्ता प्रति माह 10,000 रुपये से कम कमाते हैं, जबकि 78% दिन में 10 घंटे से अधिक काम करते हैं.

विभिन्न जातियों के मज़दूरों के बीच मतभेदों को उजागर करते हुए, रिपोर्ट बताती है कि ‘ ये आय असमानताएं पहले से मौजूद सामाजिक असमानताओं को और बढ़ाती हैं’.

रिपोर्ट बताती है कि ‘ काम के लम्बे घंटों के कारण ड्राइवर बुरी तरह थक जाते है जिसकी वजह से उन्हें सड़क पर दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है या फिर हर वक़्त दुर्घटना का जोखिम बना रहता है.

वही दुर्घटनाओं की संख्या कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों के ‘10 -minute में डिलीवरी’ जैसी नीतियों से भी बढ़ा है. सर्वे में 86% डिलीवरी कर्मचारियों ने कंपनी की ऐसी नीतियों को पूरी तरह से गलत बताया है.

अध्ययन में यह भी पाया गया कि लगभग 72% कैब ड्राइवर और 76% डिलीवरी कर्मचारियों ने माना की ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों की कई नीतियों की वजह से उनके आय में भारी गिरावट हुई है.

अनुचित मुआवजा, कोई समय नहीं

80% से अधिक ऐप-आधारित कैब ड्राइवरों और 73% डिलीवरी व्यक्तियों ने क्रमशः अपने किराए और दरों के साथ असंतोष व्यक्त किया.

उत्तरदाताओं का मानना है कि कंपनियां प्रति सवारी की दर के 31-40% के बीच कटौती करती हैं, आधिकारिक तौर पर 20% के आंकड़ों के विपरीत, 68% ने इन कटौती को मनमाना, अस्पष्ट और अनुचित पाया.

कम वेतन के अलावा 41% ड्राइवरों और 48% डिलीवरी ने बताया की उन्हें हफ्ते में एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती.

रिपोर्ट में आईडी कैंसिल और ग्राहक दुर्व्यवहार के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला गया. 83% ड्राइवरों ने बताया कि आईडी ब्लॉकिंग का मुद्दा उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. डिलीवरी कर्मियों के मामले में तो यह प्रतिशत 87%से भी अधिक है.

इसके साथ ही इन कर्मियों को ग्राहकों के ख़राब व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है. 72% ड्राइवरों का मानना है की उन्हें कस्टमर के ख़राब व्यवहार का सामना करना पड़ता है जबकि 68% डिलीवरी कर्मियों ने माना की उन्हें भी बुरे व्यवहार का सामना करना पड़ता है.

( द वायर की खबर से साभार)

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Abhinav Kumar

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