42 वर्ष के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय इस्पात निगाम लिमिटेड को कर्मचारियों को वेतन देने में हो रही परेशानी

42 वर्ष के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय इस्पात निगाम लिमिटेड को कर्मचारियों को वेतन देने में हो रही परेशानी

अपने 42 वर्ष के इतिहास में पहली बार विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (वीएसपी) की कॉर्पोरेट इकाई, राष्ट्रीय इस्पात निगाम लिमिटेड (रिनल) के लिए अपने यहां कार्यरत कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
कंपनी के पास फरवरी के महीने के लिए अपने कर्मचारियों के वेतन के भुगतान के लिए जरुरी राशि का अभाव हो गया है. वेतन का भुगतान करने के लिए ₹ 42 करोड़ की राशि की आवश्यकता होती है.

कर्मचारियों ने वेतन के भुगतान में देरी के खिलाफ एक औपचारिक विरोध के हिस्से के रूप में काले बैज पहनना शुरू कर दिया है.

विशाखापत्तनम स्टील एग्जीक्यूटिव्स एसोसिएशन (वीएसईए) के एक नेता ने बताया कि, ‘ इससे पहले हम विरोध स्वरुप अन्य कारणों से काले बैज पहनते थे, लेकिन वेतन की मांग करते हुए पहली बार हमने ये बैच लगाए’.

रिनल का गठन 18 फरवरी 1982 को किया गया था, जब वीएसपी को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) से हटा दिया गया था.

वर्तमान में स्टील प्लांट में 13,557 नियमित कर्मचारी हैं. जिनमें 9,154 गैर-कार्यकारी कैडर के कर्मचारी और 4,403 कार्यकारी (रेगुलर) कैडर कर्मचारी शामिल हैं.

RINL-VSP को कार्यकारी और गैर-कार्यकारी दोनों कर्मचारियों को केवल शुद्ध वेतन (कटौती के बाद बैंक खाते में जमा की जाने वाली राशि) का भुगतान करने के लिए प्रति माह कम से कम ₹ 80 से ₹ 85 करोड़ की आवश्यकता होती है.

इस राशि का लगभग 50% कार्यकारी के लिए है. हालांकि रेगुलर कर्मचारियों (4,403) की संख्या ठेके पर रखे गए कर्मचारियों की तुलना में कम है, लेकिन उनका वेतन अधिक है.

एक कर्मचारी ने जानकारी दी कि यदि उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया गया तो उत्पादन प्रभावित होगा क्योंकि ज्यादातर ठेके पर रखे गए कर्मचारी उत्पादन प्रणाली के अंतर्गत आते हैं जबकि रेगुलर कर्मचारी प्रशासन विभाग से सम्बंधित हैं.

वीएसईए से जुड़े एक नेता ने कहा कि ‘हमारे संयंत्र में फरवरी में बिक्री से ₹ 2,000 करोड़ से अधिक कमाने के बावजूद वेतन के लिए ₹ 42 करोड़ नहीं हैं’.

RINL के विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, 2023-24 (1 अप्रैल, 2023 से 9 मार्च, 2024 तक) के दौरान, कुल स्टील की बिक्री 39,81,690 टन थी. इसका मूल्य ₹ 22,000 करोड़ है. फरवरी 2024 में, कुल बिक्री की मात्रा 4,14,516 टन थी, जिसकी कीमत ₹ 2,161 करोड़ थी.

वही वीएसपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ‘हम मानते हैं की कर्मचारियों के वेतन में देरी हो रही है, लेकिन हम इस समस्या को जल्दी दूर करेंगे’.

(द हिन्दू की खबर से साभार)

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Abhinav Kumar

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