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क्या किसानों को फसल उठाने से रोक रही पुलिस

बरेली के कर्मपुर चौधरी में महिलाएंं बच्चे लौटे घर, दहशत बरकरार, गिरफ्तार लोगों को भेजा जेल

उत्तरप्रदेश के बरेली शहर के नजदीक कर्मपुर चौधरी गांव में दो दिन बाद कुछ रौनक लौटी है, लेकिन खाकी की दहशत से जरूरी काम अभी भी रुके हुए हैं। पुलिस गांव में आवाजाही से सन्नाटा पसरा है।

छह अप्रैल को विवाद के बाद पुलिस ने तीन महिलाओं समेत 42 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें अगले दिन कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया।

पुलिस ने अज्ञात 150 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है जिससे गांव के सभी जवान महिला व पुरुष बच्चों को लेकर पलायन कर गए थे।

एक दिन बाद पुलिस के निर्दोष लोगों पर कार्रवाई न करने के आश्वासन पर महिलाएं और बच्चे वापस घरों में लौट आए, लेकिन पुरुष अभी भी नहीं लौटे हैं।

आसपास यही चर्चा है कि लौटते ही उन्हें भी गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाएगा। पुरुषों के न लौटने से खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल के कटने पर संकट आ गया है।

वहीं घरों में पालतू जानवरों की देखभाल तो हो रही है, लेकिन उनके लिए चारा की व्यवस्था पुरुषों की गैरमौजूदगी के चलते पर्याप्त नहीं हो पा रही है।

गांव के ही कुछ लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताय कि एक-दो बड़ी डेयरी में दूध निकालने और वितरण का काम सरकारी महकमे के कर्मचारी कर रहे हैं, जिनको पास के एक इंटर कॉलेज में ठहराया गया है।

अलबत्ता इसकी जानकारी उनको भी नहीं है कि दूध वितरण की आमदनी संबंधित घरों को मिल रही है या सरकारी खाते में जा रही है।

किसानों में पुलिस की दहशत
फसल काटने में पुलिस की सख्ती को लेकर कई दूसरी जगहों से भी शिकायतें आ रही हैं। शाहजहांपुर के पंकज मिश्रा सोशल मीडिया के प्रशासन से अपील की है कि खेतीबाड़ी के कामकाज में पुलिस के अनावश्यक दखल को रोका जाएं, अन्यथा समस्या विकराल हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि गेहूं काटने गए किसान एक मीटर का फासला रखकर काम कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से भगा दिया। उन्होंने ये भी कहा कि एक किसान को पुलिस ने पीटा भी। इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने के साथ ही प्रचार भी किया जाए, जिससे किसानों में दहशत खत्म हो।

हालांकि बरेली की नवाबगंज तहसील के किसान सखावत ने बताया कि पहले के मुकाबले अब पुलिस की सख्ती नहीं है, लोग खेतों पर जरूरी कामों को कर पा रहे हैं। गांव में जनजीवन है, लोग मुख्य सड़कों पर जमा नहीं हो रहे हैं।

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