यूपी के बरेली में पुलिस पर हमला: क्या है हकीकत, क्या है फसाना

By आशीष सक्सेना

उत्तरप्रदेश के बरेली शहर के नजदीक नैनीताल रोड से सटे गांव कर्मपुर चौधरी में छह अप्रैल को हुई घटना की शुरुआत सोशल मीडिया पर सबसे पहले इन शब्दों से फैली- बरेली में 500 की भीड़ ने किया हमला, आईपीएस अभिषेक वर्मा घायल।

उसके कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर ये मुद्दा छा गया और फिर पुलिस की पिटाई के फुटेज तैरने लगे। शाम होने से पहले पुलिस तीन महिलाओं समेत करीब 50 लोगों को हिरासत में ले चुकी थी और 150 अज्ञात पर जानलेवा हमला और सेवेन क्रिमिनल लॉ समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

इसके बाद से गांव से लगभग हर जवान स्त्री-पुरुष और बच्चे घरों को खाली करके जा चुके हैं। गांव में कुछ बजुर्ग और पालतू जानवर ही बचे हैं।

पुलिस की एफआईआर के अनुसार, ”कुछ लोग इकट्ठे बैठे थे और गश्ती पुलिस ने उन्हेें टोका तो वे अभद्रता करने लगे। पुलिस ने एक व्यक्ति को पुलिस चौकी ले जाने का प्रयास किया तो गांव के लोग इकट्ठे होकर ये कहते हुए उत्पात करने लगे कि पुलिस की पिटाई से एक व्यक्ति बेहोश हो गया। बेहोशी का नाटक करने वाले युवक को अस्पताल ले जाया गया तो वह स्वस्थ पाया गया। उत्पात करने वाली भीड़ को पुलिस ने समझाने का प्रयास किया तो वे उग्र होकर मारपीट पर उतारू हो गए। चेतावनी देने पर भी नहीं माने तो नियमानुसार विधिक कार्रवाई और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। पुलिस एफआईआर के अनुसार राजीव समेत चार कांस्टेबल घायल हुए हैं। ”

तीन अन्य आरक्षियों के नाम जाहिर नहीं किए गए हैं।

एफआईआर में तब्लीगी जमातियों को तलाश करने गई पुलिस पर हमले या भीड़ के हमले से आईपीएस के घायल होने की बात दर्ज नहीं है।

ऐसा सिर्फ अधिकांश मीडिया चैनलों और अखबारों ने प्रसारित किया है। इस गांव में सुन्नी देवबंदी (तब्लीगी जमात) से जुड़े लोग नहीं रहते, बल्कि सुन्नी बरेलवी समुदाय के लोग रहते हैं, जिनका मरकज यानी केंद्र बरेली स्थित आला हजरत दरगाह है, या फिर कुछ लोग बरेली के ही सकलैन मियां के मुरीद हैं।

इसी तरह, आईपीएस 29 वर्षीय आईपीएस अभिषेक वर्मा भीड़ को पीटते हुए जब नैनीताल रोड पर दौड़ रहे थे, तब संतुलन बिगडऩे से गिर गए और एक हाथ में खरोंच आ गई।

हमने इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली। गांव के ही दूसरे हिस्से में एससी बहुल आबादी है। वहां से शुरुआती जानकारी सामने आई कि ”गश्ती पुलिस ने एक लड़के के सिर पर डंडा मार दिया, जिससे वह मरणासन्न हो गया, इससे गुस्साए लोगों ने पुलिस को घेर लिया और मारपीट हुई।”

चोटिल युवक की मां का बयान है कि ”बेटा गेहूं काटकर लौट रहा था, जिसको पुलिस ने बुरी तरह पीटा।”

घटनास्थल के ही पास रहने वाले एक सूत्र ने बताया कि युवक को उसकी मां ने परचून की दुकान से पान लेने भेजा था कि गश्ती पुलिस ने उसे रोक लिया और पिटाई कर दी। पिटाई में उसके सिर पर डंडा लगा और वह बेहोशी की सी हालत में आ गया। गश्ती पुलिस के तीन सिपाहियों ने उसे ले जाने को बाइक पर बैठाना चाहा, लेकिन वे बैठा नहीं सके और छोड़कर जाने लगे।

सूत्र के अनुसार, बेटे की पिटाई की बात सुनने पर आगबबूला होकर उसकी मां और परिवार की महिलाएं वहां पहुंच गईं और उन्होंने तीनों गश्ती सिपाहियों को पीटना शुरू कर दिया और आसपास के लोग भी वहां आ जुटे।

कुछ देर बाद इज्जतनगर थाने के एसएचओ पहुंचे तो भीड़ ने उनसे नाराजगी जाहिर की। कुछ लोग कह रहे थे कि पुलिस लोगों को गेहूं काटने को भी खेतों पर नहीं जाने दे रही, लोगों को अक्सर परेशान किया जा रहा है।

कुछ लोग बेहोश लड़के के आसपास जुटकर मीडिया को बुलाने और पुलिस का कारनामा बताने को भी कह रहे थे। एसएचओ चोटिल युवक और उसके परिवार की कुछ महिलाओं को अपनी सरकारी कार में लेकर गए।

फिर काफी लोग युवक को पीटने की एफआईआर लिखाने को चौकी पर पहुंच गए। गांव से इज्जतनगर थाने की हवाईअड्डा चौकी 150-200 मीटर दूर है।

तब तक सीओ अभिषेक वर्मा और पुलिस बल भी वहां पहुंच गए। मीडियाकर्मी भी पहुंच गए। भीड़ की नाराजगी और गश्ती पुलिस पर कार्रवाई की जिद देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज कर तितर बितर कर दिया गया।

कहा ये भी जा रहा है कि पुलिस के दौड़ाने पर कुछ लोगों ने पथराव भी किया। हालांकि, पुलिस पिटाई के वीडियो में कोई पथराव करते नजर नहीं आ रहा है।  पुलिस एफआईआर में लाठी-डंडा, जूता-चप्पल और ईंट-पत्थर की बरादमगी दिखाई गई है।

पिटाई में लुंगी पहने एक उम्रदराज मुल्ला जी पिट रहे हैं, जिनको पास के दूसरे गांव नगरिया का बताया जा रहा है, जो गेहूं काटकर लौट रहे थे।

सूत्रों का कहना है कि लाठीचार्ज के दौरान ही महिलाओं को महिला पुलिस ने पीटा। लोगों के भाग जाने या गिरफ्तार होने के बाद एसपी सिटी रवींद्र सिंह ने गांव में पहुंचकर लोगों को ये कहते हुए लताड़ा कि ‘पुलिस तुम्हारे लिए ऐसे समय सबकुछ दांव पर लगा रही है और तुम हमला कर रहे हो, शर्म आना चाहिए, कौन है जो पुलिस पर हमला करना चाहता है, सामने आए।’

एक चैनल पर बातचीत में सीओ अभिषेक वर्मा ने आरोप लगाया है कि गांव के प्रधान तसव्वर ने भीड़ को भड़काया।

यहां ये भी जानना जरूरी है कि उत्तरप्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी चल रही है और कई तरह के ऐसे मामलों में उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए मौजूदगी और नेतृत्व देते हैं।

लॉकडाउन के चलते पंचायत चुनाव कुछ महीने के लिए टल गया है।

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