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अमेरिका की चिंगारी से सुलगा फ्रांस, सड़कों पर गूंजे ‘नो जस्टिस नो पीस’ के नारे

सधे हुए कदमों से फ्रांसीसियों ने अमेरिका के साथ अपने हुक्मरानों का भी नकाब उतारा

By आशीष सक्सेना

अमेरिका में नस्लभेद की घटना के बाद जो विरोधी की जो चिंगारी आग बन गई है, उसकी आंच फ्रांस में भी पहुंच गई। बुधवार को यहां हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और ‘नो जस्टिस नो पीस’ (इंसाफ नहीं तो शांति नहीं) का नारा बुलंद कर हुक्मरानों के दिलों में दहशत पैदा कर दी ।

अश्वेतों की भी जिंदगी के मायने हैं (ब्लैक लाइव्स मैटर) के विरोध प्रदर्शनों के समर्थन और फ्रांस में अश्वेत एडामा ट्रॉरे की हत्या पर इंसाफ की मांग को लेकर 20 हजार से ज्यादा लोगों ने पेरिस की सड़कों पर कदम रखा।

‘न्याय नहीं तो शांति नही’ के गगनभेदी नारों के साथ ये प्रदर्शनकारी राजधानी के कोर्ट हाउस के सामने इका हुए और अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड व फ्रांस के एडामा ट्रॉरे की हत्या पर आक्रोश जताकर नस्लवाद के खात्मे का आह्वान किया।

 

कोरोनोवायरस महामारी के दौरान 10 से अधिक लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध के कारण पेरिस के प्रीफेक्ट ने विरोध को मंजदूरी नहीं दी थी, लेकिन फिर भी प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीक से शुरू हो गया।

पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारियों की कई जगहों पर झड़प हुई। सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना मिलते ही फ्रांस के कई दूसरे शहरों में भी फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या और उथल-पुथल के बाद से फ्रांस में भी माहौल गरमा रहा था। यहां के लोगों ने ट्रॉरे की हत्या जैसी समानता देखी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फ्रांस ने पुलिस बर्बरता के कई मामले देखे हैं जिसका विरोध भी हुआ।

 

चौबीस वर्षीय ट्रॉरे की पेरिस के एक पुलिस स्टेशन में गिरफ्तारी के दो घंटे बाद मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य विशेषज्ञों की राय में भी अंतर था।

पहले तीन विशेषज्ञों ने दिल की बीमारी या संक्रमण को मौत का कारण बता दिया था। जुलाई 2016 में पुलिस बर्बरता के कारण जॉर्ज फ्लॉयड की तरह एक युवा अश्वेत व्यक्ति की मौत हो गई थी।

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