stranded workers in GZB

अभूतपूर्व बेरोज़गारी-2: हर दस साल में पूंजीवाद क्यों दिवालिया हो जाता है?

By एस. वी. सिंह पूंजीवादी अर्थव्यवस्था अपने चक्रीय संकटों और बेरोज़गारी के बगैर रह ही नहीं सकती? कुछ मुट्ठी भर लोगों की सम्पन्नता और बाकी सारे समाज की दरिद्रता, अति-उत्पादन …

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निजीकरण-2ः क्या सरकारें कोयला खदानों को अपनी जागीर समझती हैं?

By ए. प्रिया मोदी जी ने कोयले को भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अतिआवश्यक स्तम्भ बताते हुए बड़ी धूर्तता से इस स्तम्भ को खोखला कर निजी कंपनियों को सौंपने के कई फायदे …

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