लेबर कोड के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई मासा की रैली की झलकियां- फ़ोटो गैलरी

चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ दो साल से मज़दूर वर्ग में गुस्सा पनप रहा है और कोरोना काल की तबाही के बाद अब अंदर अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर कल 13 नवम्बर रविवार को देश की राजधानी दिल्ली में इन्हीं लेबर कोड के विरोध में मज़दूरों ने प्रदर्शन का आयोजन किया गया था, जिसमें देश भर से आए मजदूरों ने हिस्सा लिया।

इस रैली की कुछ झलकियां आप यहां देख सकते हैं-

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देश भर से जुटे दर्जनों मज़दूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों, चाय बागान वर्कर, मनरेगा, आंगनबाड़ी वर्कर, निर्माण मज़दूर, फैक्ट्री वर्कर्स, सफाई कर्मचारी, आंगनवाड़ी वर्कर्स, महिला घरेलू कामगार, खेतिहर मज़दूरों ने  प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

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रैली में दिल्ली एनसीआर के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, बिहार, बंगाल, असम, हिमाचल, छत्तीसगढ़ से लेकर कर्नाटका, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों से हजारों मज़दूर, छात्र व मज़दूर पक्षधर लोग पहुंचे थे। कार्यक्रम में भारी पैमाने पर महिलाओं ने भागीदारी की।

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पुरुलिया, पश्चिम बंगाल से आए कलाकारों ने लोकनृत्य पेश कर कलात्मक रूप से अपना प्रतिरोध दर्ज कराया।

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रैली से पहले रामलीला मैदान में तमाम मज़दूर नेताओं ने संबोधित किया। मोदी सरकार द्वारा थोपे जा रहे नए लेबर कोड्स को मज़दूरों को बंधुआ बनाने वाला बताया। सरकार के देश बेचो अभियान पर हल्ला बोला।

रैली राष्ट्रपति भवन तक जानी थी लेकिन उसे रामलीला मैदान के बाहर कुछ दूरी पर ही रोक दिया गया। इससे पहले रामलीला मैदान में सभा हुई जिसे देश भर से आए मजदूर नेताओं ने संबोधित किया।

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संगठित व असंगठित मज़दूरों, खेतिहर मज़दूरों, स्वीजी, जोमैटो, ऑल-उबर जैसे गिग व प्लेटफ़ॉर्म वर्कर, आईटी-आइटीएस वर्कर आदि के बुनियादी अधिकारों और महँगाई-बेरोजगारी, छँटनी-बंदी पर लगाम लगाने आदि माँगें उठीं।

भारी पुलिस बल के बीच रामलीला मैदान से रैली निकली और मज़दूर विरोधी नए लेबर कोड को वापस लेने, देश की सरकारी-सार्वजनिक उद्योगों-संपत्तियों को बेचने पर रोक लगाने आदि माँगों को उठाया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।

दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान के पास ही रैली को रोक लिया। लेकिन मज़दूर संगठनों कोर ट्रेड यूनियनों के अथक प्रयासों के बाद रैली करने की अनुमति दे दी गयी थी।

रैली में स्टूडेंट्स, युवा और मज़दूर नेताओं ने नए लेबर कोड को मज़दूरों के लिए बेहद खतरनाक बताया, जिसके लागू होने से मज़दूरों के हालात 100 साल पीछे चले जाएंगे।

प्रदर्शन में बिहार से आई महिलाओं ने मनरेगा में मिलने वाली दिहाड़ी को बढ़ने की मांग की। बिहार ग्रामीण मज़दूर यूनियन के सदस्य ने बताया कि वे लोग ट्रेन की जरनल बोगी में 20 – 25 घंटों के सफर के बाद दिल्ली पहुंचे हैं।

रैली में महिलाओं की खासी मौजूदगी दर्ज की गई जो अपने साथ अपने बच्चों को भी लेकर आई थीं।

प्रदर्शनकारी मजदूरों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब पुलिस ने रैली शुरू होने के कुछ देर बाद ही रौक दिया और प्रदर्शनकारी आगे जाने पर अड़ गए। इस बीच नई दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़क पर ही सारे प्रदर्शनकारी बैठ गए।

पुलिस ने आखिरकार पांच प्रतिनिधिमंडल को ज्ञापन देने की इजाज़त दी, और रैली को रामलीला मैदान के दूसरी ओर पुरानी दिल्ली की व्यस्त सड़क की ओर मोड़ दिया।

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ज्ञापन देकर नेताओं के लौटने के बाद ही रैली के समापन की घोषणा की गई। नेताओं ने कहा कि “यह आक्रोश रैली चेतावनी रैली थी, और आने वाले समय अगर मांगों पर सरकार कोई सुनवाई नहीं करती है तो मज़दूर अगली बार रुकने वाले नहीं।”

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