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उत्तरप्रदेश के औरैया में प्रवासी मजदूरों से भरे ट्रक की डीसीएम से भिड़ंत में 24 की मौत, 35 घायल

चूने की बोरियों से लदे ट्राला पर बैठकर दर्जनों मजदूर परिवार समेत दिल्ली- राजस्थान से घर जा रहे थे

उत्तर प्रदेश में औरैया जिले के कोतवाली क्षेत्र में शनिवार तड़के दो वाहनों की भिड़ंत में 24 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि लगभग 35 मजदूर घायल हो गए।

हादसा तड़के ढाई से तीन बजे के बीच चिरूहली- मिहौली गांव के बीच हुआ, जब एक चूना लदा ट्राला सड़क किनारे खड़े एक मिनी ट्रक से टकरा कर पलट गया। चूने से लदे ट्राला में सवार श्रमिक चूने की बोरियों के नीचे दब गए।

हादसे में 24 की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में उनके शवों को चूने की बोरियां हटाकर निकाला गया। घायल 15 श्रमिकों को नाजुक हालत में सैफई मेडिकल यूनीवर्सिटी अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि 20 का इलाज औरैया जिला भर्ती किया गया है। कई क्रेनों से ट्राला और डीसीएम में फंसे मजदूरों को निकाल कर एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया।workers on truck

मृतकों और घायलों में ज्यादातर की पहचान कर ली गई है। कई श्रमिक परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। जिले के जिम्मेदार अफसरों के अनुसार श्रमिक बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं जो दिल्ली और राजस्थान के भरतपुर से वापस अपने घरों को लौट रहे थे।

हादसे में मारे गये लोगों में राहुल निवासी गोपालपुर थाना पिंडा जोरा झारखंड, नंद किशोर नंद निवासी पिंडा जोरा, केदारी यादव निवासी बाराचट्टी बिहार, अर्जुन चौहान, राजा गोस्वामी, मिलन निवासी पश्चिम बंगाल, गोवर्धन , अजीत निवासी ऊपर बन्नी पुरुलिया पश्चिम बंगाल,चंदन राजभर, नकुल महतो, सत्येंद्र निवासी बिहार, गणेश निवासी पुरुलिया पश्चिम बंगाल, उत्तम, सुधीर निवासी गोपालपुर, कीर्ति खिलाड़ी, डॉ मेहंती, मुकेश, सोमनाथ गोस्वामी के तौर पर की गई है। अन्य नौ की शिनाख्त नहीं हुई है।

यहां बता दें, प्रवासी मजदूरों के पलायन के दौरान पिछले सप्ताहभर में ये चौथा भीषण हादसा है, जिसमें दो दर्जन मजदूर मारे गए। इससे पहले मध्यप्रदेश के गुना में दो वाहनों की टक्कर में आठ मजदूरों की मौत हुई और उसी दिन उत्तरप्रदेश के मुजफ्फर नगर में छह मजदूरों को रोडवेज बस ने कुचल दिया। इससे पहले औरंगाबाद में 16 मजदूरों को मालगाड़ी ने काट दिया।

सेवा में श्री मान हरियाणा सरकार, सविनय निवेदने यह है कि मै प्रार्वी गामा प्रसाद ग्राम सभा लोहर बभनौली थाना सलेमपुर विधान सभा सलेमपुर उत्तर प्रदेश का स्थाई निवाशी हूं मै दिल्ली कापसहेड़ा गांव में रहता हुं। गुड़गांव हरियाणा में काम करता हूं, और मेरे जैसै मजदूर दिल्ली में तादातो में रहते हैं। गुड़गांव कि कम्पनी कुछ खुली है, और कम्पनियों ने मजदूरों को पास बनाकर दिया है। मगर हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस जाने नहीं दे रही है। हम दोनो सरकार से पुछना चाहते हैं और केद्र सरकार से भी पुछना चाहते हैं। हम मजदूरों का दुश्मन कौन है। जो मजदूरों के साथ सौतेला व्यहार कर रहा है। मोदी सरकार छात्रों को अपने गांव बुलवा रही है। यहा तक पंजाब सरकार श्रध्दालुओं को पंजाब बुलवा रही है। सभी सरकारों से मेरा सवाल है। दिल्ली,हरियाणा में फसे मजदूर क्या भारत के नहीं हैं। आज दिनांक 08/05/2020 दिन शुक्रवार गुड़गांव बार्डर कापसहेड़ा में पुलिस मजदूरों को लाठिया बरसा रही है। एक तरफ मजदूरों को लाठिया बरसा रही है। एक तरफ मजदूरों को अपने घर कि चिन्ता, दूसरे तरफ रोटी कि चिन्ता, ना तो सरकार काम करने दे रही है। ना तो हमें हमारे गांव जाने दे रही हैं। मजदूरों को थोड़ा सा खाना पाने के लिए 10 बजे ही लाईन लगाना पड़ता है। तब जा कर उसे 1 बजे खाना मिलता है। कापसहेड़ा गांव में खाना मिलता है। वह खाना किसी सरकार का नहीं है। वह कापसहेड़ा गांव का लाकेश यादव है। हम दिल्ली सरकार से पुछना चाहते हैं कि क्या लाकेश यादव को सरकार पैसा देती है। क्या दिल्ली सरकार आधार कार्ड ऑनलाइन कराने पर राशन देती वह भी जिनका मैसेज आया है। वह मजदूर रात आठ बजे लाइन लगाता है और छ: बजे बोला जाता है कि आप कल आवो फिर वह मजदूर तीन बजे लाइन लगाता है। कभी मिला कभी नहीं मिला येसे में मजदूर क्या करे एक तरफ खाई है एक तरफ कुवां। सरकार को दारू की दुकानों को खोलना जरूरी है। सरकार कहती है मजदूरों को, सोशल डिस्टेन्सिंग फॉलौ करे। क्या विकास सरकार की मीडिया देख रही है। सोशल डिस्टेन्सिंग की धज्जिया उड़ाई जा रही है। क्या दारू की किमत आम आदमी से ज्यादा है। मै गामा प्रसाद पुछना चाहता हूं कि हम मजदूरों का नेता कौन है। हम मजदूरों का सरकार कौन है। हम मजदूर का मीडिया कौन है। हमारी सरकार से यही अपील हैं कि हमें हमे हमारे गांव जाने दिया जाए नहीं तो कोरोना से बाद में भुख से पहले मर जाएंगे। धन्यवाद गामा प्रसाद 9958912085

हालांकि सरकार अपनी बेदिली का प्रदर्शन लगातार कर रही है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट भी प्रवासी मजदूरों की तकलीफ को सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा। बुधवार को औरंगाबाद में ट्रेन से कट कर मज़दूरों की मौत पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अगर लोग ट्रैक पर सो जाएं तो क्या किया जा सकता है? जिन्होंने पैदल चलना शुरू कर दिया, उन्हें हम कैसे रोकें?’

वहीं सरकार ने कहा, ‘सबके लौटने की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन लोग अपनी बारी की प्रतीक्षा नहीं कर रहे।’ सरकार और अदालत का ये रुख तब है, जबकि लॉकडाउन में 89 प्रतिशत को वेतन नहीं मिला और वे दाने-दाने को मोहताज हो गए। कमरे का किराया देने का भी किराया नहीं रहा।

मजबूर मजदूरों की हालत रोज नए दर्दनाक तरीके से दिखना जारी है, ये सिलसिला थम ही नहीं पाया है, जबकि लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू कराने का ऐलान प्रधानमंत्री कर चुके हैं।

अलबत्ता, प्रवासी मजदूरों से मुंह फेर लेने वाली सुप्रीम कोर्ट को शराब की दुकानों के खुलने को लेकर चिंता है। शुक्रवार को शराब की दुकानें बंद करने की मांग करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दाखिल की जाती हैं। यहीं, याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का हर्जाना ठोंक दिया।

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