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मई दिवस पर ट्रेड यूनियनों ने घर में ही रहकर लिया संकल्प, मज़दूर विरोधी नीतियों का कड़ा विरोध

कई संगठनों ने फ़ेसबुक लाईव करके आज के मज़दूर समस्याओं पर रखी अपनी राय

इस बार अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पूरी दुनिया में कैदियों जैसी हालत में मनाया गया। कोरोना वायरस के चलते जिन देशों में लॉकडाउन है, वहां तो आनुष्ठानिक कार्यक्रम ही हो पाए।

फिर भी मजदूर वर्ग के लिए चिंतित संगठनों, यूनियनों और समाजसेवियों ने सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में मई दिवस पर एकजुटता और मज़दूर वर्ग के ऐतिहासिक मिशन का संकल्प लिया।

किसी ने फेसबुक या यूट्यूब लाइव करके मई दिवस का किस्सा सुनाया, किसी ने मौजूदा वक्त की चुनौतियों पर विचार रखे, तो कहीं लॉकडाउ में मज़दूरों को आ रही समस्याओं पर मोदी सरकार की नाकामी की निंदा की।

इंकलाबी मजदूर केंद्र, मज़दूर सहयोग केंद्र से लेकर टीयूसीसी, टीयूसीआई, इंटक, एटक, सीटू ने मज़दूर दिवस को मनाया और सोशल मीडिया के मार्फत अपनी बात मज़दूरों तक पहुंचाई।

बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने सभी से वाट्सएप डीपी लगाकर मई दिवस मनाने की अपील की।

फरीदाबाद की आजादनगर झुग्गी के छोटे दुकानदार नरेश चंद ने प्रवासी मजदूरों के लिए 24 घंटे भूख हड़ताल की।

महाराष्ट्र में काम करने वाली ट्रेड यूनियन हमाल पंचायत के कार्यकर्ता चंदन कुमार ने कहा कि वो पूरे दिन भूख हड़ताल करके सरकार को सदेश देना चाहते हैं।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

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