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तो क्या एंड्योरेंस मालिकों ने अशांति फैलाने के लिए लॉकआउट कराना चाहा था?

एंड्योरेंस वर्करों को कोर्ट से बड़ी राहत, 31 तक नहीं जाएगी नौकरी

ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी मानेसर की एंड्योरेंस कंपनी के छंटनी के आदेश के ख़िलाफ़ वर्करों को पहली सफलता मिली है।

कोर्ट ने कंपनी के इस तर्क को नहीं माना कि वहां बहुत कम मज़दूर काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें एकतरफ़ा छंटनी करने का अधिकार है।

एंड्योरेंस वर्कर्स यूनियन के प्रेजिडेंट अमित सैनी

इस कंपनी ने 29 जून 2018 को 25 FFA के तहत तालाबंदी का नोटिस दिया था।

कोर्ट ने कहा है कि इस नोटिस के संबंध में लेबर डिपार्टमेंट ने एक जांच कमेटी से जांच कराई जिसमें पता चला कि तालाबांदी की ये कोशिश, इस क्षेत्र में औद्योगिक और लेबर अशांति फैलाने की लगती है।

फैसले में ये भी कहा गया है कि हरियाणा के राज्यपाल भी इस जांच रिपोर्ट से सहमत हैं कि तालाबंदी की ये कोशिश अशांति फैलाने की मंशा से की गई है।

इसलिए कोर्ट ने कहा कि कंपनी की 25FFA की नोटिस को खारिज किया जाता है और इसकी जगह 25K इस कंपनी पर लागू होता है क्योंकि पिछले 12 महीने में कंपनी में 300 से कम मज़दूर काम कर रहे हैं न कि 100 से कम।

कोर्ट के आदेश की कॉपी

 

कंपनी के 25FFA की नोटिस के तहत एंड्योरेंस वर्करों को 31 अगस्त तक निकाल देने का फैसला था लेकिन कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद मज़दूरों को एक बड़ी राहत मिली है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में सस्पेंशन, ट्रांसमिशन और ब्रेक के पार्ट्स बनाने वाली एंड्योरेंस कंपनी, खुद को अपने क्षेत्र में भारत की अग्रणी कंपनियों में से एक मानती है।

कंपनी ने लेबर डिपार्टमेंट से कहा है कि उनके यहां गुड़गांव के मानेसर प्लांट में 300 से कम श्रमिक हैं.

जबकि एंड्योरेंस इम्प्लाई यूनियन के ज्वाइंट सेक्रेटरी अमित सैनी ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि अभी भी कंपनी में 467 कुशल और अकुशल श्रमिक उत्पादन में लगे हुए हैं।

एंड्योरेंस इकलौती कंपनी नहीं है बल्कि पिछले कुछ महीनों में ही क़रीब दो दर्जन कंपनियों में तालाबंदी और छंटनी की कार्रवाई का मज़दूर सामना कर रहे हैं।

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