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सस्ते मजदूरों की चाहत में जापानी कंपनी ‘निस्सिन’ घरों से बुलाकर नौकरी से करने लगी बाहर

लॉकडाउन का वेतन न मिलने और निष्कासन से आक्रोशित मजदूरों ने दी हड़ताल की चेतावनी

भले ही दबाव में राजस्थान की गहलोत सरकार ने फिर आठ घंटे काम को ही मान लिया, लेकिन कंपनियां “आपदा के बहाने अवसर” नहीं गंवाना चाहतीं।

आपदा को अवसर बनाने के लिए कंपनियों ने नया फंडा अख्तियार करना शुरू कर दिया है। पहले से मौजूद लोगों को निकालो और नए सस्ते लोगों की कतार से भर्ती कर लो।

इसी राह पर नीमराना स्थित जापानी कंपनी निस्सिन बे्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चल पड़ी है। हद तो तब हो गई जब ‘पक्के’ होने की आस में बैठे तमाम युवा मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर दूर से बुलाकर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जाने लगा।

अचानक निष्कासन और मई का वेतन न मिलने से आक्रोशित मजदूरों की 10 जून को प्रबंधन के अधिकारियों से नोकझोंक हुई। मनमानी न रुकने पर मजदूरों ने प्रबंधन को हड़ताल की चेतावनी दी है।

नौकरी से निकालने की मुसीबत उनके सामने ज्यादा है, जिनकी भर्ती एसोसिएट प्रशिक्षु बतौर की गई थी और जिन्हें बाकायदा इस शर्त के साथ रखा गया कि ट्रेनिंग पूरी होने पर नौकरी स्थायी कर दी जाएगी।

ऐसे ही एक एसोसिएट ट्रेनी वर्कर अजीत यादव ने मामले की शिकायत नीमराना-अलवर के एसडीएम से भी की है। उन्होंने ‘वर्कर्स यूनिटी’ को बताया कि लॉकडाउन की घोषणा होने पर कंपनी ने भी अगले आदेश तक काम रोक दिया और सभी को अवकाश पर भेज दिया।

सभी मजदूर अपने जैसे-तैसे अपने गांव चले गए। इसके बाद 22 मई को कंपनी के प्रबंध निदेशक तोरू ईगाराशी ने नोटिस जारी किया कि सभी को 25 मई तक वापस आकर सूचना देना है, जिससे 31 मई के बाद कंपनी संचालन का डाटाबेस तैयार हो सके।

ये भी कहा गया कि आने वाले मजदूरों को कंपनी में आने से पहले 14 दिन कोरंटीन होना है। अजीत बताते हैं, कंपनी के एचआर विभाग ने बार-बार फोन और मैसेज करके वापसी का दबाव बनाया। जैसे-तैसे उधारी करके हजारों रुपये खर्च कर टैक्सी से 750 किलोमीटर का सफर कर नीमराना पहुंचे। सूचना देकर कोरंटीन भी हुए 14 दिन।

कोरंटीन का समय पूरा होने पर शिफ्ट में नाम भी डाला गया, लेकिन फिर कॉल आ गई कि कंपनी नहीं आना है। कुछ मजदूरों को वापस लिया भी गया, लेकिन बाकी से इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसा तब है, जबकि 70 प्रतिशत मजदूरों को मई महीने का वेतन भी नहीं दिया गया।

जब एचआर से बात की गई तो टालमटोल और बहाने के अलावा कोई जवाब नहीं मिलता। कभी कुछ कहते हैं, कभी कुछ। एक मजदूर से इस्तीफा लिखवा लेने की भी चर्चा है।

कंपनी की यूनियन ने भी परेशान हाल इन मजदूरों की पहल पर साथ देने का वादा किया है। मजदूरों ने 11 जून को सामूहिक तौर पर बड़ा फैसला लेने के संकेत दिए हैं, जिसको लेकर कंपनी प्रबंधन भी चौकन्ना है।

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