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वूमेन हेल्पलाइन के कर्मचारियों को मिली राहत, नौकरी से न निकालने का निर्देश

अपर श्रमायुक्त के साथ वार्ता में वर्कर्स फ्रंट के प्रतिनिधियों ने मजबूती से रखा पक्ष

By आशीष सक्सेना

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीन जुलाई को 181 आशा ज्योति वूमेन हेल्पलाइन में कार्यरत 351 कर्मचारियों को राहत मिल गई। बकाए वेतन और नौकरी से निकालने की नोटिस दिए जाने के संबंध में अपर श्रमायुक्त अपर श्रमायुक्त ने सेवा प्रदाता कंपनी जीवीके रिसर्च इंस्टीट्यूट को किसी भी कर्मचारी को कार्य से न हटाने का निर्देश दिया।

अपर श्रमायुक्त ने कंपनी द्वारा बकाए भुगतान के लिए समय मांगे जाने पर एक सप्ताह का समय प्रदान देकर अगली वार्ता की तिथि 10 जुलाई निर्धारित की है। वार्ता में सेवा प्रदाता कंपनी के मानव संसाधन के प्रबंधक व श्रमिक पक्ष से यूपी वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर, रुचि राठौर, दीप्ति आदि मौजूद रहे।

अपर श्रमायुक्त ने वार्ता की मिनट्स में लिखते हुए सेवा प्रदाता कंपनी को निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 6ई के तहत दौरान वार्ता कंपनी किसी भी कर्मचारी को उसकी सेवा से पृथक नहीं करेगी, कंपनी को सेवा से पृथक करने की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाना चाहिए।

श्रमिक पक्ष से वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहा की सेवा प्रदाता कंपनी को बताना चाहिए कि जब महिला कल्याण विभाग ने उसे 181 आशा ज्योति वूमेन हेल्पलाइन को बंद करने का कोई लिखित निर्देश नहीं दिया है तो किस अधिकार के तहत उसने कार्यरत महिला कर्मचारियों को कार्य से पृथक करने की नोटिस दी है।

स्वभाव से यह नोटिस विधि के विरुद्ध है और मनमर्जीपूर्ण है। उन्होंने एचआर हेड को सलाह दी कि वह तत्काल इसे वापस ले लें अन्यथा गैरकानूनी कार्य के कारण उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने के लिए भी बाध्य होना पड़ेगा।

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