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क्या दिल्ली, हरियाणा में फंसे मज़दूर भारत के नहीं हैं? एक मज़दूर ने हरियाणा सरकार को लिखी चिट्ठी

दिल्ली गुड़गांव बार्डर पर पुलिस उत्पीड़न से परेशान एक मज़दूर ने भेजी चिट्ठी

सेवा में हरियाणा सरकार से सविनय निवेदने है कि मैं प्रार्थी गामा प्रसाद ग्राम सभा लोहर बभनौली थाना सलेमपुर विधान सभा सलेमपुर उत्तर प्रदेश का निवासी हूं।

मैं दिल्ली के कापसहेड़ा गांव में रहता हूं और पड़ोसी राज्य हरियाणा के गुड़गांव में काम करता हूं और मेरे जैसे मज़दूर दिल्ली में भारी तादात में रहते हैं।

गुड़गांव कि कुछ कंपनियां खुली हैं और इन कंपनियों ने मजदूरों को पास बनाकर दिया है। मगर हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस जाने नहीं दे रही है। हम दोनों सरकारों से पूछना चाहते हैं और केद्र सरकार से भी पूछना चाहते हैं।

हम मजदूरों का दुश्मन कौन है? जो मज़दूरों के साथ सौतेला व्यहार कर रहा है।

मोदी सरकार छात्रों को अपने गांव बुलवा रही है। यहा तक पंजाब सरकार श्रद्धालुओं को पंजाब बुलवा रही है।

सभी सरकारों से मेरा सवाल है। दिल्ली, हरियाणा में फंसे मज़दूर क्या भारत के नहीं हैं? 8 मई दिन शुक्रवार को गुड़गांव दिल्ली के बार्डर कापसहेड़ा में पुलिस ने मजदूरों पर जमकर लाठियां बरसाईं।

एक तरफ़ मजदूरों को लाठियां बरसा रही है दूसरी तरफ़ मज़दूरों को अपने घर कि चिंता, रोटी कि चिंता, ना तो सरकार काम करने दे रही है, ना तो हमें हमारे गांव जाने दे रही है।

मज़दूरों को थोड़ा सा खाना पाने के लिए सुबह 10 बजे ही लाईन लगाना पड़ता है। तब जा कर उसे दोपहर 1 बजे खाना मिल पाता है। कापसहेड़ा गांव में खाना मिलता है, वह खाना किसी सरकार का नहीं है।

वह कापसहेड़ा गांव का लाकेश यादव है। हम दिल्ली सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या लाकेश यादव को सरकार पैसा देती है?

क्या दिल्ली सरकार आधार कार्ड ऑनलाइन कराने पर राशन देती है, वह भी जिनका मैसेज आया है? वह मज़दूर दोपहर 3 बजे लाइन लगाता है और तो शाम छ: बजे बोला जाता है कि आप कल आओ।

कभी मिला कभी नहीं मिला। ऐसे में मज़दूर क्या करे एक तरफ़ खाई है एक तरफ कुआं। सरकार को दारू की दुकानों को खोलना ज़रूरी है। सरकार कहती है मज़दूरों को, सोशल डिस्टेसिंग फॉलो करना पड़ेगा। क्या सरकार की बिकाऊ मीडिया ये सब देख रही है?

सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्या दारू की क़ीमत आम आदमी से ज़्यादा है। मैं गामा प्रसाद पूछना चाहता हूं कि हम मज़दूरों का नेता कौन है? हम मजदूरों की सरकार कौन है?

हमारा मज़दूर का मीडिया कौन है? हमारी सरकार से यही अपील हैं कि हमें हमारे गांव जाने दिया जाए, नहीं तो हम कोरोना से बाद में, भूख से पहले मर जाएंगे।

धन्यवाद, गामा प्रसाद

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