पानीपत के बाद अब नोएडा में उठी सैलरी बढ़ाने की मांग, हिंसक हुआ मज़दूरों का प्रदर्शन

पानीपत के बाद अब नोएडा में उठी सैलरी बढ़ाने की मांग, हिंसक हुआ मज़दूरों का प्रदर्शन

वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर पानीपत के बाद अब नोएडा में मज़दूरों का प्रदर्शन हिंसक हो उठा।

13 अप्रैल, सोमवार को सुबह ही नोएडा इंडस्ट्रियल एरिया में हज़ारों की तादाद में मज़दूरों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।

नोएडा के सेक्टर 62 और फ़ेज़-2 के फ़ैक्ट्री इलाक़ों में मज़दूरों को प्रदर्शन हुआ और कई जगहों पर तोड़फोड़ और पत्थरबाज़ी की और कई वाहनों को आग के हवाले किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।

इन इलाकों की फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले मज़दूर वेतन बढ़ाने, काम के आठ घंटे करने, ओवरटाइम डबल करने, बोनस देने, कामकाज का बेहतर माहौल बनाने और फ़ैक्ट्रियों में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कमेटी बनाने की मांग कर रहे थे।

मज़दूरों के प्रदर्शन के कारण दिल्ली और नोएडा के बीच ट्रैफ़िक लगभग ठप पड़ गया क्योंकि प्रशासन ने ट्रैफ़िक को डायवर्ट कर दिया था। सड़कों पर लगे घंटों जाम में हज़ारों लोग फंसे रहे।

curtsey BBC
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सोमवार को असल में क्या हुआ?

इंडिया टुडे की ख़बर के अनुसार, मज़दूरों ने नोएडा के सेक्टर 63 में स्थित मारुति सुजुकी के अधिकृत सर्विस सेंटर विपुल मोटर्स पर जमकर हंगामा किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामे के दौरान 4 से 5 गाड़ियों में आग लगा दी गई, जबकि लगभग 20 से 25 गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए।

एक पत्रकार ने विपुल मोटर्स का एक वीडियो एक्स पर साझा किया है जिसमें दो गाड़ियों और सिक्योरिटी केबिन में भयंकर आग लगी दिख रही है।

कुछ मज़दूरों ने बताया कि सोमवार को नोएडा फ़ेज़-2 स्थित मदरसन कंपनी में मज़दूर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कई दिनों से आंदोलनरत थे। जब उन्होंने मांग तेज़ की तो उनका उत्पीड़न किया गया। सोमवार को इस प्रदर्शन ने व्यापक रूप ले लिया। यहां कई गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई। कंपनी पर पथराव हुआ।

एक एक्स यूज़र ने कुछ वीडियो साझा किए हैं जिसे मज़दूरों ने ही बनाया है। इसमें एक मज़दूर को कहते सुना जा सकता है कि मज़दूरों पर लाठी चार्ज करने से प्रदर्शन हिंसक हो गया है। इसी वीडियो में कुछ मज़दूर एक पुलिस वैन को पटलने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

बीबीसी के एक पत्रकार ने पांच घंटे बाद उस इलाक़े का दौरा किया जिसमें वह एक फ़ैक्ट्री का भी भ्रमण किया जहां सिक्योरिटी केबिन के कांच बिखरे पड़े थे।

बीबीसी के अनुसार, कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। हज़ारों की संख्या में मज़दूर सड़कों पर उतरे हुए थे और सड़कों पर यातायात ठप पड़ गया था।

समाचार एजेंसियों के वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि नोएडा में सड़कों पर यातायात लगभग ठप है और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ आगजनी हुई है। सड़कों पर ईंट पत्थर दिख रहे हैं। कई गाड़ियों पर मज़दूरों ने गुस्सा उतारा और तोड़फोड़ के बाद उन्हें पलट दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ फुटेज में दिख रहा है कि फ़ेज़-2 एक युद्ध मैदान जैसा बन गया है। मज़दूरों ने फ़ैक्ट्री पर पत्थरबाज़ी की जबकि पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले दागे।
एक पत्रकार ने नोएडा सेक्टर एक के आसपास का एक वीडियो शेयर किया जिसमें प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग एक पत्रकारों से हाथापाई कर रहे हैं।

curtsey Social Media Screen Grab
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प्रदर्शनकारी मज़दूरों ने क्या कहा?

प्रदर्शनकारियों में से एक लक्ष्मी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “मैं मदरसन में काम करती हूँ। वे हमें कम वेतन दे रहे हैं। हमें ज़्यादा वेतन चाहिए। जब ​​हमने धरना दिया, तो उन्होंने बिना किसी ग़लती के हमारी पिटाई की।”

“सिलेंडर, सब्ज़ियाँ और सब कुछ महँगा है… आज जब हमने विरोध प्रदर्शन किया तो हमारी पिटाई हुई। मेरे पैरों में चोट लगी। मेरी माँग है कि हमें 20,000 रुपये वेतन दिया जाए। तभी हम अपना गुज़ारा कर पाएँगे, वरना विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।”

बीबीसी के एक रिपोर्टर ने एक फ़ैक्ट्री वर्कर रविंदर कुमार से बात की। रविंदर ने बताया, “चार छह दिन पहले ही सरकार ने आदेश दिया है कि सैलरी बढ़नी चाहिए। इस महंगाई की वजह से खर्चा नहीं चल पाएगा। 10-11 हज़ार में कैसे गुजारा होगा आप बताईए। सिलेंडर की महंगाई, सब्जी की महंगाई देखो, इसमें इंसान का खर्चा खुराकी तो नहीं चल पाएगी। इसीलिए लोग कह रहे हैं कि सैलरी बढ़ाओ।”

एक अन्य महिला मज़दूर ने बताया, “हम लोग सुबह सुबह छोटे छोटे बच्चों को छोड़कर कंपनी आते हैं ड्यूटी करने के लिए। और इसमें टार्गेट न पूरा हो तो कंपनी वाले धमकी देकर भगाते हैं। कहते हैं निकल जाओ गेट पास ले लो। सैलरी रोक लेते हैं। और सरकार बढ़ाती है तो ये सब कम करके देते हैं। अभी तक इन्होंने ये नहीं बताया कि सरकार की ओर से कितनी सैलरी बढ़ी है।”

एक नौजवान वर्कर पुष्पेंद्र कुश्वाहा ने कहा, “सरकार ने बोल दिया है कि एक अप्रैल से ओवरटाइम डबल होगा। सैलरी बढ़ाई जाएगी। इन सबको मिलाकर हमारी सैलरी 20,000 रुपये पहुंच रही है। पर वो हमें मिल ही नहीं रहा है। कंपनी वाले कहते हैं कि जब सरकार लागू करेगी तब हम करेंगे। अब बताईए हम क्या करें।”

अधेड़ उम्र के एक फ़ैक्ट्री वर्कर ने कहा, “हमारे यहां एक हेल्पर की सैलरी 11 हज़ार रुपये है। इतने में आज की डेट में आप क्या कर सकते हैं? अभी हम फ़ैक्ट्री से निकले हैं। सारी फ़ैक्ट्रियां खाली हो रही हैं। जबतक फैसला नहीं होता काम नहीं होगा, नहीं होगा।”

एक महिला ने एक पोस्टर ले रखा था जिस पर लिखा था- हम मज़दूर एक हैं। 18,000, 20,000 हेल्पर- 15000. उस महिला ने कहा, “हम मज़दूर हैं, हमारा हक़ मिलना चाहिए। कारीगर को 18 से 20 हज़ार सैलरी और हेल्पर को 15 हज़ार सैलरी मिलनी चाहिए।”

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गिरफ़्तारियां और एफ़आईआर, दिल्ली पुलिस चौकन्नी

इंडिया टुडे के मुताबिक़, नोएडा पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर ग़लत जानकारी देने के लिए कांग्रेस सोशल मीडिया कोआर्डिनेटरों मीर इलियास और अनुशी तिवारी पर एफ़आईआर दर्ज की है। कथित तौर पर इन्होंने एक्स परदावा किया था कि विरोध प्रदर्शनों में 14 लोगों की मौत हो गई जबकि 32 घायल हैं।

ये भी पता चला है कि लखनऊ से जनचेता पुस्तक केंद्र के तीन वरिष्ठ मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं को पुलिस ने नोएडा में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया है। इनमें एक कवियत्री कात्यायनी हैं और दूसरे वरिष्ठ पत्रकार और आलोचक सत्यम वर्मा हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि पुलिस नोएडा में मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से हिंसा भड़काने वाले लोगों की पहचान कर रही है और उन पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा, “जैसे ही उनकी पहचान हो जाएगी, उनके ख़िलाफ़ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

नोएडा की घटना से दिल्ली पुलिस भी चौकन्नी हो गई है और कई जगहों पर पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुख्य बॉर्डर प्वाइंट्स पर बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है, किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।

curtsey Social Media Screen Grab
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नोएडा ज़िलाधिकारी ने क्या कहा

नोएडा की ज़िलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा है कि फ़ैक्ट्री मालिकों के साथ बैठक के बाद उन्हें मज़दूरों की मांग पूरी करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ये सुनिश्चित करेगा कि उनकी ये मांगें पूरी हों।

मेधा रूपम ने बताया कि प्रशासन ने पिछले दो-तीन दिनों के दौरान औद्योगिक यूनिट्स के साथ बैठकें की हैं।

ज़िलाधिकारी ने एक वीडियो संदेश में कहा, “सैलरी हर महीने की 10 तारीख़ तक दिया जाएगा। ओवरटाइम का डबल भुगतान किया जाएगा। हर मज़दूर को साप्ताहिक छुट्टी दी जाएगी। हर फ़ैक्ट्री में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता महिलाएं करेंगी। शिकायत पेटी रखी जाएगी।”

उन्होंने कहा, “सभी श्रमिकों को नियम के मुताबिक बोनस दिया जाएगा। बोनस अधिकतम 30 नवंबर से पहले उनके बैंक खातों में ट्रांसफ़र हो जाएगा।”

ज़िला अधिकारी के अनुसार, साथ ही सभी मज़दूरों को वेतन की पर्ची अनिवार्य रूप से दी जाएगी। ज़िले स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं जहां मज़दूर अपनी शिकायत दर्ज़ करा सकते हैं। ये नंबर है- 0120-2978231/0120-2978232/0120-2978862/0120-2978702.

दरअसल नोएडा में ये हलचल तीन दिनों से चल रही थी। मज़दूर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन सोमवार को मज़दूरों का ग़ुस्सा बेकाबू हो गया।

ज़िलाधिकारी के मुताबिक़ ये सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रमिकों का वेतन एकमुश्त हर महीने की 10 तारीख़ से पहले उनके बैंक खाते में ट्रांसफ़र हो जाए। साथ ही सभी को अनिवार्य तौर पर वेतन पर्ची दी जाएगी।

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हरियाणा में वेतन वृद्धि, नोएडा में असंतोष

मज़दूर लंबे समय से उत्तर प्रदेश में कम वेतन को लेकर चिंता जता रहे थे। ख़ासकर पड़ोसी हरियाणा की तुलना में वेतन कम होने की शिकायतें थीं। हरियाणा में हाल ही में न्यूनतम वेतन लगभग 14,000 रुपये से बढ़ाकर 19,000 रुपये कर दिया गया है।

पड़ोस के दिल्ली में भी न्यूनतम वेतन लगभग 18000 से 24,000 के आस पास है, जोकि केजरीवाल की सरकार में ही बढ़ाए गए थे।

इसके उलट, नोएडा के मज़दूरों का दावा है कि उन्हें वेतन लगभग 11,000 से 13,000 रुपये ही मिलता है, जिससे गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मज़दूरों की मांग का समर्थन किया।

वहीं मुज़फ़्फ़रनगर में एक रैली में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार मज़दूरों के साथ है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ”नोएडा में वेतन बढ़ाने को लेकर उग्र हुए आंदोलन का कारण भाजपा सरकार की वो एकतरफ़ा नीति है जो पूंजीपतियों का पोषण करती है। लेकिन सामान्य काम करने वाले कर्मचारियों और वेतनभोगी श्रमिकों-मज़दूरों का शोषण।”

उन्होंने लिखा, ”भाजपाई चंदादायी पूंजीपतियों के एटीएम में तो पैसे भरते जा रहे हैं, लेकिन श्रमिकों-मज़दूरों के वेतन के लिए इनके एटीएम खाली हैं। बेतहाशा महंगाई के इस दौर में कम वेतन पर घर चलाना कितना मुश्किल है, ये एक परिवारवाला ही समझ सकता है। वेतनभोगी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!”

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “सरकार उद्यमियों को सुरक्षा देगी और प्रत्येक श्रमिक को संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें उचित मानदेय भी सुनिश्चित करेगी। हमने गत वर्ष ही एक आउटसोर्सिंग कॉरपोरेशन का गठन किया था और इसी महीने उसकी सिफारिशें लागू होने जा रही हैं।”

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