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भूखे प्यासे मजदूर का साइकिल से सात दिन में 1700 किलोमीटर का सफर

लॉकडाउन होने पर महाराष्ट्र से उड़ीसा में अपने घर पहुंचने को रोजाना चलाई 16 घंटे साइकिल

By सुशील मानव

इनसे मिलिए। नाम है महेश जेना और उम्र 20 वर्ष।
महेश फिलहाल उड़ीसा के जाजपुर जिले में आइसोलेशन में रोककर रखे गए हैं।

महेश ने महाराष्ट्र से अपने गृहराज्य उड़ीसा तक 1700 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी साइकिल चलाकर 7 दिनों में तय की है। इसके लिए महेश ने प्रतिदिन 16 घंटे साइकिल चलाई।

महेश महाराष्ट्र के सांगली मिराज के औद्योगिक क्षेत्र में लोहा ढलाई फर्म में प्रतिमाह 15 हजार रुपये के वेतन पर काम कर रहे थे। लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद, उन्हें घर के अंदर रहने को कहा गया।

उस समय महेश की जेब में सिर्फ तीन हजार रुपये थे। जबकि महेश को अपने आवास और भोजन के लिए कम से कम छह हजार रुपये प्रति माह की आवश्यकता पड़ती।

एक सप्ताह के लिए बेकार रहने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि लॉकडाउन जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है। उनके संसाधन तेजी से घट रहे थे। उन्होंने अफवाहें सुनीं कि उद्योग धंधे अगले तीन महीनों तक बंद रहेंगे।

महेश कहते हैं कि लॉकडाउन का असर यह हुआ कि कोई भी पैसा उधार देने को राजी नहीं था। अत: मैंने जाजपुर के बदसुरी गाँव में अपने घर वापस जाने का फैसला किया। क्योंकि यह मेरे अस्तित्व की बात थी। 1 अप्रैल को, मैं ओडिशा के लिए निकल पड़ा। हालांकि, मेरे पास कोई नक्शा नहीं था, मुझे अपनी पिछली रेल यात्राओं से प्रमुख रेलवे स्टेशनों के नाम याद थे। मैंने उसी बुनियाद पर अपनी साइकिल यात्रा 1 अप्रैल को शुरु की।

वह भोर से पहले ही साइकिल चलाना शुरू कर देते और दोपहर के भोजन के समय तक जारी रखते। आवश्यक सामान ले जाने वाले ट्रक ड्राइवरों के लिए कुछ सड़क के किनारे के ढाबे खुले थे। वह अपनी साइकिल की सीट पर फिर से बैठने से पहले दो से तीन घंटे खाने, आराम करने और झपकी लेने में बिताते थे।

महेश बताते हैं- मैं औसतन 200 किमी प्रतिदिन के करीब साइकिल चलाता था।

गर्मी की थकावट से परेशानी हो रही थी, लेकिन मैं विचलित नहीं हुआ। मैंने घर पहुँचने की ठानी। रात के दौरान, मैं मंदिरों, स्कूलों और सड़क के किनारे ढाबों जैसे सुरक्षित स्थानों की तलाश करके रुकता।

महाराष्ट्र की सीमा पर, जब पुलिस ने उनसे उनकी यात्रा के बारे में पूछताछ की, तो उन्होंने अपनी साइकिल-यात्रा का वर्णन करके उन्हें आश्वस्त किया।

वह प्रतिदिन लगभग 16 घंटे साइकिल चलाते थे। अपनी यात्रा शुरू करने के चार दिन बाद, महेश ने एक अजनबी के मोबाइल फोन से अपने परिवार के सदस्यों को अपने साइकिल से आने की सूचना दी। ये सुनकर उनका परिवार बहुत चिंतित था और उन्हें सावधानी बरतने की सलाह दी।

महेश 7 अप्रैल को देर शाम तक अपने जाजपुर जिले में पहुंच गए। उनके परिवार के सदस्यों ने महेश के पहुंचने की सूचना जाजपुर जिला प्रशासन को दी।

इसके बाद प्रशासन द्वारा महेश को बिचित्रपुर के उपेंद्र कुमार हाईस्कूल में बने क्वारंटाइन सेंटर में भेज दिया गया।

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