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प्रवासी मज़दूरों से जुड़ा डेटा न देने से सूचना अधिकारी पर बिफरा केंद्रीय सूचना आयोग

आरटीआई में प्रवासियों के राज्यों और ज़िलों में पहुंचने के बारे में मांगी गई थी जानकारी

एक आरटीआई आवेदन में मज़दूरों से जुड़़ा आंकड़ा देने से इनकार करने पर केंद्रीय सूचना आयोग ने केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को कड़ी फटकरा लगाई है।

आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक के एक आरटीआई आवेदन दायर करने पर मज़दूरों से जुड़ा डेटा सीपीआईओ ने देने से इनकार कर दिया था। सीपीआईओ ने जवाब में कहा कि ‘हमारे पास मज़दूरों से जुड़ा कोई डाटा उपलब्ध नहीं हैं।’

श्रम आयुक्त ने 8 अप्रैल को एक दिशानिर्देश जारी कर के कहा था कि हमारे सभी क्षेत्रिय कार्यलाय देशभर में लॉकडाउन के कारण फसें प्रवासी मज़दूरी की गिनती तीन दिन के भीतर करें।

इस आदेश के 15 दिन बाद ही वेंकटश नायक ने आरटीआई दाखिल कर यह आंकड़े मांगे थे कि राज्यों और उनके जिलों में कितने प्रवासी मजदूर पहुंचे। लेकिन, सीपीआईओ ने ऐसे किसी डाटा को देने से इनकार कर दिया था।

सीपीआईओ की इस हरकत पर केंद्रीय सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीपीआईओ को फटकार लगाई है।

सूचना आयुक्त वनजा एन सरना ने कहा कि मुख्य श्रम आयुक्त के दफ्तर के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने आरटीआई आवेदन पर बेहद रूखा और लापरवाही भरा रवैया अपनाया।

सीआईसी ने कहा कि देशभर में फंसे हुए मजदूरों के संबंध में श्रम मंत्रालय की वेबसाइट पर जानकारी प्रकाशित करनी चाहिए और इसे लगातार अपडेट भी करना चाहिए।

सरना ने कहा इन असामान्य हालात में वेंकटेश नायक की आवेदन पर ध्यान दिया जाना ज़रूरी है। हम एक एडवायजरी जारी कर रहे हैं। इसके तहत संबंधित विभाग (श्रम मंत्रालय) को एक मजबूत और तेज वेबसाइट बनाने की आवश्यकता है।

देशभर में फंसे हुए मजदूरों के संबंध में क्षेत्रीय कार्यालयों से मिलने वाली सभी जानकारी को तुरंत इस वेबसाइट पर पब्लिश किया जाए।

उन्होंने कहा, “इस मौके पर यह जरूरी हो जाता है कि सीपीआईओ अपनी पूरी ताकत क्षेत्रीय कार्यालयों से डाटा इकट्ठा करने और तुरंत इन आंकड़ों को वेबसाइट पर पोस्ट करने में लगाए। भले ही यह काम टुकड़ों-टुकड़ों में करना पड़े।”

सरना ने फटकार लगाते हुए पूछा कि जब श्रम आयुक्त ने फंसे हुए मजदूरों के संबंध में डाटा इकट्ठा करने के लिए पत्र जारी किया था, तो इस पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया।

सीईसी का कहना था कि बिना किसी शक के यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि सीपीआईओ ने इस आरटीआई आवेदन पर बेहद रूखा और लापरवाही वाला रवैया दिखाया।

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