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वेतन कटौती को लेकर नोएडा की गारमेंट फ़ैक्ट्री में मज़दूरों का धरना प्रदर्शन

मार्च के बाद जब फैक्ट्री खुली तो मैनेजमेंट ने लॉकडाउन की सैलरी देने से साफ़ मना कर दिया

नोएडा में एक गारमेंट फ़ैक्ट्री के खुलते ही हंगामा हो गया। सोमवार को फैक्ट्री खुलने पर जब मज़दूर पहुंचे तो मार्च अप्रैल महीने की सैलरी न मिलने को लेकर प्रबंधन और मज़दूरों में कहासुनी हो गई।

इसके बाद सैकड़ों मज़दूरों ने फैक्टरी के बाहर ही धरना प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

द वायर की ख़बर के अनुसार, मजदूरों ने आरोप लगाया कि मैनेजमेंट ने मार्च से वेतन नहीं दिया है और उसे देने से इनकार भी कर दिया है।

पुलिस उपायुक्त (जोन द्वितीय) हरीश चंदर का कहना है कि फेस-तीन पुलिस थाना के तहत आने वाले इलाके में ये फैक्टरी है। यह लॉकडाउन की वजह से मार्च से बंद थी।

उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह जब मजदूर काम करने पहुंचे तो उन्होंने कंपनी प्रबंधन को अवगत कराया कि उन्हें मार्च से अब तक का वेतन नहीं मिला है।

चंदर ने कहा कि मजदूरों ने पहले वेतन देने और फिर काम करने की बात कही। जब फैक्टरी प्रबंधन ने वेतन देने में आनाकानी की तो मजदूरों ने हंगामा शुरू कर दिया तथा फैक्टरी के गेट पर नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मजदूरों को समझाना-बुझाना चाहा, लेकिन वे शांत नहीं हुए।

पुलिस अधिकारी फैक्टरी प्रबंधन तथा मजदूरों के बीच बातचीत करा रहे हैं।

वहीं फैक्टरी प्रबंधन का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से फैक्टरी बंद थी और उन्हें खरीददार से भुगतान नहीं मिला है, जिस वजह से मजदूरों को वेतन देने में असुविधा हो रही है।

लेकिन वेतन देने को लेकर प्रबंधन का कोई साफ़ जवाब अभी तक सामने नहीं आ पाया है।

उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन घोषित करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेतन न काटने की बात कही थी, लेकिन देश में 80 प्रतिशत मज़दूरों को लॉकडाउन के दौरान की सैलरी नहीं मिली है।

वर्कर्स यूनिटी को रोज़ ही दर्जनों संदेश आते हैं जिनमें सैलरी काटने की शिकायत होती है।

लेबर कमिश्न और स्थानीय प्रशासन की मदद से वर्कर्स यूनिटी और इंकलाबी मज़दूर केंद्र ने गुड़गांव और मानेसर क्षेत्र की कुछ फ़ैक्ट्रियों में मज़दूरों को मार्च की सैलरी दिलवाने में मदद की, लेकिन फैक्ट्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि ये कोशिशें भी ऊंट के मुंह में जीरे जैसी साबित हुई हैं।

इधर मोदी सरकार ने घोषणा के तौर पर भले ही 20 लाख करोड़ रुपये की घोषणा कर दी लेकिन मज़दूरों की बकाया सैलरी को लेकर मुर्दा चुप्पी साध ली।

इस वजह से मज़दूरों में काफ़ी आक्रोश है। वेतन कटौती को ही लेकर पिछले दिनों जम्मू के कठुआ में चेनाब टेक्सटाइल मिल के 7000 मज़दूरों ने प्रदर्शन किया था और बाद में पुलिस से उनकी भिड़ंत भी हो गई थी।

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