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गुड़गांव की रिचा कंपनी पर मुसलमान मज़दूरों को काम पर न लेने का आरोप

कंपनी ने आरोपों को ख़ारिज किया, कहा- कापसहेड़ा में रहने वाले मज़दूरों को वापस नहीं लिया जा रहा

गुड़गांव की रिचा कंपनी पर मुस्लिम वर्करों को नौकरी से निकालने का आरोप लगा है।

उद्योग विहार फ़ेज़-3 में कपड़ा बनाने वाली रिचा एंड कंपनी के कुछ मज़दूरों ने कहा है कि गुरुवार को उन्हें मुसलिम होने के नाते गेट में घुसने नहीं दिया गया।

मज़दूरों का आरोप है कि ऊपर से आदेश है कहते हुए उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया।

हिंदू अख़बार के मुताबिक, कंपनी ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उनके पास बड़ी संख्या में मुस्लिम मज़दूर हैं और उसने अपने यहां धर्म आधारित कोई नियम नहीं बनाए हैं।

वर्कर्स यूनिटी को पत्र लिखकर तीन मज़दूरों ने शिकायत की है कि वो पिछले छह सालों से कंपनी में काम करते आए हैं लेकिन गुरुवार को उन्हें कंपनी में लेने से मना कर दिया गया और केवल हिंदू मज़दूरों को इजाज़त दी गई।

बाबुल हक़ ने आरोप लगाया कि जब वो गुरुवार को कंपनी गए तो पर्सनल मैनेजर मनीष पांडे ने कहा कि मुसलमान को नहीं रखा जाएगा।

बाबुल का दावा है कि उनके जैसे 50 मज़दूरों को लौटाया गया है।

मोहम्मद फिरदौस ने कहा कि उनके पास कमरे का किराया देने तक के पैसे नहीं है और राशन और पैसे ख़त्म हो चुके हैं।

फिरदौस का भी कहना है कि उन्हें भी गेट के अंदर नहीं जाने दिया गया। एक अन्य वर्कर ने कहा कि मुस्लिम वर्करों के नाम के आगे लाल स्याही का निशान लगाया गया था।

उनका आरोप है कि ऐसे वर्करों को पहले लाइन में लगाया गया और फिर घर लौट जाने को कहा गया।

फिरदौस कहते हैं, “मैनेजर ने बताया कि मुस्लिमों को रमज़ान के बाद ही बुलाया जाएगा।”

इन मज़दूरों का कहना है कि अगर उन्हें काम नहीं मिला तो उनके लिए ज़िंदा रह पाना मुश्किल होगा।

द हिंदू ने कंपनी के जनरल मैनेजर अमरदीप डागर के हवाले से कहा कि ‘ये नहीं हो सकता। बहुत से मुस्लिम वर्कर हमारे साथ काम करते हैं। सच्चाई ये है कि बहुत सारे टेलर मुसिल्म हैं। हमने कभी भेदभाव नहीं किया।’

हालांकि उन्होंने कहा कि कापसहेड़ा में रहने वाले वर्करों को काम पर नहीं लिया जा रहा है क्योंकि उस इलाक़े में कोरोना के मामले मिले हैं। बाबुल हक़ कापसहेड़ा में रहते हैं।

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