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सुज़ुकी का मज़दूर कोरोना पॉज़िटिव, अस्पताल ने भर्ती नहीं किया, मकान मालिक ने घर से निकाला

सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा- ‘घर जाओ गोलियां खाते रहना ठीक हो जाओगे।’

By खुशबू सिंह

गुड़गांव में सुजुकी बाइक के एक कैजुअल वर्कर को कोरोना होने पर पहले अस्पताल ने भर्ती करने से मना कर दिया और फिर मकान मालिक ने भी उसे घर से निकाल दिया।

कंपनी में काम करने वाले कैजुअल वर्कर आशीष मिश्रा को 11 जून को दोपहर में  पता चला की उन्हें कोरोना हो गया है।

इसके बाद अस्पताल में भर्ती होने के लिए जद्दोजहद शुरू हो गई। गुड़गांव सेक्टर 10 में स्थित एक अस्पातल ने आशीष को भर्ती करने से इनकार कर दिया।

इस वर्कर के साथ जो कुछ हुआ उससे हरियाणा के इस पूरे औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले वर्करों में दशहत का माहौल है।

एक वर्कर ने नाम ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा ‘घर जाओ गोलियां खाते रहना ठीक हो जाओगे।’  आशीष जब घर पहुंचे तो मकान मालिक ने साफ़ तौर पर कह दिया ‘तुम अस्पताल चले जाओ वरना मैं तुम्हे घर से निकाल दूंगा’।

इस वर्कर के अनुसार, गुड़गांव सेक्टर 10 में स्थित उसी अस्पताल में आशीष फिर जा पहुंचे और हज़ार मिन्नते करने के बाद भी अस्पताल में कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ।

सात घंटे बाद किया गया भर्ती

पीड़ित आशीष दोपहर एक बजे अस्पताल के गेट पर ही बैठ गए और ‘बोले जब तक अंदर भर्ती नहीं करोगे तब तक यहां से उठूंगा नहीं।’

इस जद्दोजहद में दोपहर से शाम हो गई तब जाकर 7 बजे सेक्टर 10 के अस्पताल ने आशीष को सेक्टर 9 में स्थित इएसआई अस्पताल में भर्ती कराया।

आशीष मिश्रा के भाई ने फ़ोन पर बताया कि ‘उन्हें 25 मई से ही सर्दी, खांसी की शिकायत थी। उन्होंने ने 8 जून को अपना कोरोना टेस्ट कराया> 11 जून को रिपोर्ट आई तो पता चला कि वे कोरोना संक्रमित हैं।’

इएसआई अस्पताल के कोरोना वार्ड में भर्ती आशीष ने फ़ोन पर बताया कि, ‘वे पिछले तीन साल से मारूती सुज़ुकी में काम कर रहे हैं। तीन महीने हो गए हैं, कंपनी ने पूरा वेतन नहीं दिया है।’

उन्होंने कहा कि, “पैसों की तंगी के वजह से जीवन वैसे ही मुश्किल में चल रहा था। लॉकडाउन के बाद कंपनी शुरू हुई तो सोचा, शायद मुश्किलें अब हल हो जाएंगी पर क्या पता था कोरोना मेरा इंतज़ार कर रहा है।”

ऑटो सेक्टर बना हॉट स्पॉट

आशीष मिश्रा उत्तरप्रदेश के बलिया ज़िले के रहने वाले हैं। हरियाणा के खिड़की डोला में तीन हज़ार रुपये किराए का कमरा लेकर अपने दो अन्य मज़दूर साथियों के साथ रहते हैं।

उन्होंने बताया कि वो महीने में 9-10 हज़ार रुपये कमा लेते हैं। आशीष आगे कहते हैं, “इस मुश्किल की घड़ी में कंपनी की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिली।”

24 मई को टीएन लेबर में छपी एक खबर के अनुसार, ‘ऑटो सेक्टर कोरोना के मामलों में अगला हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है। अब तक, गुड़गांव में मारुति सुज़ुकी प्लांट, मानेसर और एमआरएफ़ पुडुचेरी में ऑटो कंपोनेंट निर्माता कंपनी के मज़दूर इसकी चपेट में आ चुके हैं।

लॉकडाउन खुलने के बाद कंपनियों में काम करने वाले वर्करों में कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं।

इन वर्करों से बिना किसी हेल्थ सुविधा और सुरक्षा उपायों के काम कराया जा रहा है और जब उनमें कोरोना के लक्षण दिखने लगते हैं तो मज़दूरों के पैसे से बने ईएसआई अस्पताल में भी भर्ती के लिए उन्हें ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

और कंपनियां कोरोना संक्रमित अपने वर्करों से पल्ला झाड़ ले रही हैं। उधर मोदी सरकार ने न केवल सैलरी देने के अपने आदेश को वापस ले लिया बल्कि मज़दूरों को कंपनी के रहमो करम पर छोड़ दिया है।

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