ख़बरेंप्रमुख ख़बरेंवर्कर्स यूनिटी विशेष

इस महा विपदा में मोदी ने पल्ला झाड़ लिया, ख़त्म हो जाएंगी 2.5 करोड़ नौकरियां

कोरोना वायरस की महामारी से मजदूर वर्ग को कितना चिंतित होना चाहिए

By आशीष सक्सेना

प्रधानमंत्री और कुछ बड़ी कंपनियों ने कर्मचारियों के लिए जुबानी तौर भले ही नौकरी और वेतन के मसले पर आश्वासन दिया है या विचार कर रहे हैं।

अलबत्ता, नए कोरोना वायरस नेे मजदूर वर्ग के लिए महज सेहत का नहीं, बल्कि भविष्य में रोजी-रोटी का संकट का संकेत देना शुरू कर दिया।

मॉल, दुकानें, छोटे-बड़े कारखानों में ठेकेदारी के तहत काम करने वालों की छंटनी शुरू होने के संकेत मिलना शुरू हो गए हैं। ग्राहकों या उत्पादन के घटने से काम से निकालने का सिलसिला शुरू हो गया है।

ऐसा सिर्फ इस बहाने पर भी किया जा रहा कि किसी को सामान्य सर्दी लग गई है तो उसे नहीं आना है।

ये ठीक उसी तर्ज पर है जैसे रेलवे ने यात्रियों के घटने से गाडिय़ों को निरस्त कर दिया है। इससे सिर्फ वे ही कर्मचारी आश्वस्त हैं जिनकी नौकरी पक्की है, वे नहीं जो ठेकेदारी के तहत काम कर रहे हैं।

क्या मजदूर वर्ग कोरोना वायरस प्रूफ है?

क्या मजदूर वर्ग कोरोना वायरस प्रूफ है? फ़ैक्ट्रियां क्यों नहीं बंद की गईं, मज़दूरों को मास्क और सैनेटाइज़र कंपनियां क्यों नहीं दे रही हैं? मज़दूरों को पेड लीव क्यों नहीं दी जा रही है? अगर भारत में ये बीमारी फैली तो मज़दूर वर्ग का एक बड़ा हिस्सा चपेट में आएगा। सरकार मज़दूरों को लेकर क्यों नहीं चिंतित है? देखिए मेडिकल डेटा रिसर्च एक्सपर्ट के साथ बातचीत।#CoronaVirus #Covid19 #कोरोनावायरस #कोविड19

Posted by Workers Unity on Saturday, March 14, 2020

महामारी लाएगी बेरोज़ग़ारी

कोरोना वायरस की महामारी के माहौल में प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को रोजगार मुहैया कराने वाले मालिकों से कर्मचारियों से हमदर्दी के साथ पेश आने की अपील की।

लेकिन इसका कितना असर होगा इसका अंदाजा पहले से मौजूद नियम कानून लागू करने की मंशा से जाहिर है।

सरकार न सिर्फ सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में बेचने की कोशिश में है, बल्कि निजी मालिकाने को कोई तकलीफ न हो, इसलिए मजदूरों की सेहत और वेतन को लेकर खासी लापरवाही की छूट दे दी गई है।

आने वाली सूचनाएं भारत के लिए लगभग सही हैं, इसका अंदाजा इससे भी लगा सकते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने भी मौजूदा महामारी से बेरोजगारी बढऩे और 2.5 करोड़ नौकरियां खत्म होने का अनुमान लगाया है।

एजेंसी के अनुसार, महामारी की वजह से भयानक आर्थिक संकट जन्म लेगा, जिसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई देगा।

workers solidarity silwasa

सरकार ने छोड़ा मालिकों के भरोसे

ऐसे में मजदूर वर्ग को कितना चिंतित होना चाहिए, ये जानना-समझना बहुत जरूरी हो गया है।

सरकार का बचाव बंदोबस्त बहुत लचर, नाकाफी और संपन्न वर्ग की जरूरत तक ही सीमित है। जबकि ये महामारी अगर मजदूर वर्ग के पास तक पहुंची तो देश में कहर बरपेगा।

देश महामारी के संभावित तीसरे चरण में दाखिल हो गया है और संक्रमण के केस बढऩे के साथ ही मौत का आंकड़ा भी बढऩा शुरू हो चुका है।

मजदूर वर्ग सबसे खतरनाक स्थिति में है, क्योंकि उसके पास जीने-मरने के हालात हर तरफ हैं।

वह चाहे कारखानों में हो या खेतों में। मजूदरों को राहत के मामले में सरकार सिर्फ अपील से काम चला रही है, जो मालिकों के विवेक पर निर्भर है, जिस पर भरोसा बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता।

corona virus testing and readiness of india
वर्कर्स यूनिटी का सुझाव

वर्कर्स यूनिटी का सुझाव है कि फौरी तौर पर मजदूर वर्ग का एक राष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क स्थापित किया जाए।

इस नेटवर्क के साथ मजदूर वर्ग और उसके सहयोगी तबकों से हमदर्दी रखने वाले संगठन, पार्टी, मंच, स्वतंत्र कार्यकर्ता जुड़ें।

शहर, कारखानों, बस्ती, मुहल्लों में टीमें बनाई जाएं, जो मजदूरों और उनके परिवारों की मदद को हाजिर हो सकें।

ऐसे चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, राशन की व्यवस्था के लिए ये नेटवर्क एक दूसरे की मदद करे।

असंगठित मजदूरों के लिए सार्वजनिक उपक्रमों की व्यवस्था का भी लाभ दिलाने की कोशिश की जाए, जो वहां की ट्रेड यूनियनें करा सकती हैं।

वर्कर्स यूनिटी की ओर से फेसबुक पेज बनाकर इसकी अपील की जा रही है और संबंधित अपडेट और सूचनाएं साझा की जा रही हैं।

जो लोग भी मजदूर वर्ग के नेशनल हेल्थ इमरजेंसी नेटवर्क में सहयोग करना चाहते हैं, वे हमें सूचित करें। या फिर कोई संगठन इसकी जिम्मेदारी ले सकता है।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं।)

Tags
Show More

Related Articles

Back to top button
Close
Enable Notifications    Ok No thanks