श्रीलंका में 10 लाख सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में मिलेगी 3 दिन छुट्टी, कामकाजी सप्ताह सिर्फ 4 दिन का

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भयंकर आर्थिक संकट ने आखिरकार श्रीलंका को सप्ताह में चार दिन की ड्यूटी पर ला ही दिया, जिसकी पूरी दुनिया में बहुत लंबे समय से मांग की जा रही है।

मौजूदा संकट से उबरने के लिए श्रीलंका सरकार ने अपने 10 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए शुक्रवार को भी छुट्टी घोषित कर दी है।

इसका मतलब ये हुआ कि अब श्रीलंका में अब चार दिन का कामकाजी सप्ताह होगा।

जो अतिरिक्त छुट्टी दी जा रही है, उसमें उम्मीद की जा रही है कि कर्मचारी अपने अहाते या खाली जगह पर सब्ज़ी-अनाज उगाएंगे।

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हालांकि चार दिन के कामकाजी सप्ताह की योजना फिलहाल अगले तीन महीने तक लागू रहेगी क्योंकि सरकार को अंदेशा है कि आने वाले समय में भुखमरी के हालात पैदा हो जाएंगे।

गौरतलब है  कि श्रीलंका में बीते कुछ महीनों में खाने पीने की चीजें डेढ़ गुनी महंगी हो गई हैं क्योंकि महंगाई दर 57 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है।

तेल की खपत कम करने की तरकीब?

पेट्रोल और पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में करीब 100 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने से सार्वजनिक यातायात से लेकर महंगाई तक में आग लगी हुई है।

देश में विदेशी मुद्रा अपने न्यूनतम स्तर पर है और ऐसे में पेट्रोल का आयात कम करने पर पूरा जोर है।

चार दिन के कामकाजी सप्ताह से सार्वजनिक परिवहन में कमी आएगी और तेल के बढ़ते दामों पर काबू करने में ये तरकीब मदद कर सकती है।

हालांकि बहुत पहले से उदारवादी अर्थशास्त्री भी कह रहे हैं कि पूंजीवाद के मौजूदा संकट को कम करना है तो जिस अनुपात में उत्पादन बढ़ा है, उसका फायदा वर्करों को भी मिलना चाहिए।

इसमें कई तरह के सुझाव दिए गए, जिनमें से एक चार दिनी कामकाजी सप्ताह को लागू करना भी शामिल है।

अमेरिका में समाजवादी नेता बर्नी सैंडर्स तो कार्पोरेट घरानों पर दबाव डाल ही रहे हैं कि वे अपने अकूत मुनाफ़े में अपने वर्करों को भी हिस्सेदार बनाएं, ताकि तेजी से बढ़ती गैरबराबरी कम हो सके।

यूरोप में कई देशों में और कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को चार दिनी कामकाजी सप्ताह की छूट दी है।

इसके पीछे सबसे बड़ा तर्क ये भी है कि कामकाजी सप्ताह को चार दिन का करने से बेरोज़गारी पर भी लगाम कसी जा सकती है क्योंकि तब अधिक संख्या में कर्मचारियों की ज़रूरत होगी।

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