इंटरार्क के पंतनगर प्लांट से मशीन शिफ़्ट करने की कोशिश नाकाम, मज़दूरों के प्रतिरोध के आगे झुका मैनेजमेंट

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उत्तराखंड के पंतनगर सिडकुल क्षेत्र में स्थित इंटरार्क कंपनी प्रबंधन द्वारा मशीनों को अवैध रूप से प्लांट से बाहर शिफ्ट करने की एक और कोशिश को मज़दूरों ने अपनी एकजुटता के दम पर नाकाम कर दिया।

बीते 2 अगस्त को कंपनी प्रबंधन ने हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए पंतनगर प्लांट से मशीनों को शिफ्ट करने की कोशिश की।

गौरतलब है कि विगत कई दिनों से इन्टरार्क प्रबंधक पंतनगर एवं किच्छा के प्लांट से गैरकानूनी रूप से लगातार मशीनों को फैक्ट्री परिसर से बाहर शिफ्ट करने की योजना के अंतर्गत कार्य कर रहा है।

उधर, कंपनी प्रबंधक व प्रशासन की ओर से इन्टरार्क मजदूरों पर बाल शोषण एवं बाल अधिकार हनन के दर्ज मुकदमा में नैनीताल हाई कोर्ट ने स्टे दे दिया है।

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गौरतलब है कि कंपनी में ताला लगाने के बाद मैनेजमेंट उसे फिर से खोलने पर मजबूर हुआ है। लेकिन जबसे दोबारा प्लांट चालू हुआ है, मैनेजमेंट ने ने पंतनगर प्लांट से यूनियन अध्यक्ष, महामंत्री सहित अबतक 27 मज़दूरों को तथा किच्छा प्लांट से करीब 50 मज़दूरों को निलंबित कर चुका है।

दोनों प्लांटों से 32 मज़दूर पूर्व से निलंबित/बर्खास्त चल रहे हैं। यही नहीं प्रबंधन ने 5 लाख 50 हजार रुपए मजदूरों से वसूली का नोटिस जारी कर दिया है।

Interarch workers sat infront of company gate

निलंबन मामले में मैनेजमेंट को फटकार

इस बीच 5 अगस्त को निलंबन मामले में डीएलसी हल्द्वानी में वार्ता हुई। इस दौरान डीएलसी ने जब कंपनी प्रबंधकों से पूछा कि जिन संरक्षित कर्मकारों को निलंबित किया है उनकी मंजूरी श्रम अधिकारी से कब ली गई उस अनुमति पत्र को पेश किया जाए। लेकिन प्रबंधन कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

जिन अभिलेखों को श्रम अधिकारी द्वारा पिछली वार्ता में ठुकरा दिया गया था उन्हीं अभिलेखों को लेकर प्रबंधन पुनः डीएलसी के पास उपस्थित हुआ। डीएलसी ने प्रबंधन को पुनः निर्देशित किया कि अगली वार्ता में कानून संगत एवं तर्कयुक्त अभिलेख लेकर आप उपस्थित हों।

ज्ञात हो कि ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार के द्वारा किसी भी मजदूर संगठन के संरक्षित कर्मकारों को निलंबित करने से पहले श्रम अधिकारी के अनुमति आवश्यक है।

इन्टरार्क मजदूर संगठन ऊधम सिंह नगर के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने बताया कि पंतनगर की तालाबंदी खोलने के बाद प्रबंधन ने यूनियन तोड़ने की कार्यवाही में जी जान लगा दिया है। श्रमिकों के बीच में फूट डालकर उनकी ताकत को कमजोर करने की कोशिश हो या श्रमिकों के बीच में अपने एजेंटों के माध्यम से भ्रम फैलाकर आंदोलन को गलत दिशा में मोड़ने के लिए रची जा रही साजिश का मामला हो, ये तमाम कृत्य इन्टरार्क कंपनी के प्रबंधन द्वारा लगातार किया जा रहा है।

जब ऐसी साजिश कामयाब नहीं हो पा रही हैं तो प्रबंधक ने उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेशों की अवमानना करते हुए पंतनगर फैक्ट्री से मशीनों को बाहर निकाल कर कहीं अन्य शिफ्ट करने की योजना पर कार्य करना शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत बार-बार कंपनी प्रबंधन द्वारा फैक्ट्री के अंदर से मशीनों को वाहन में रखकर फैक्ट्री गेट से बाहर ले जाने की कोशिश की जाती है।

इन्टरार्क मजदूर संगठन किच्छा के महामंत्री पान मोहम्मद ने कहा कि जब मजदूर उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेशों की अनुपालना करने की दुहाई देते हैं तो उनका वीडियो बनाया जाता है एवं कर्मचारियों का कोड संख्या सिक्योरिटी गार्ड द्वारा नोट कर लिया जाता है। बाद में द्वेषपूर्ण कार्यवाही करते हुए उन चिन्हित कर्मचारियों को या तो निलंबित किया जाता है या तो फैक्ट्री परिसर के भीतर कार्यक्षेत्र में ड्यूटी के दौरान परेशान किया जाता है।

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एक साल से प्लांट के बाहर धरना

प्रबंधन की मंशा पर रहस्य बना हुआ है। आखिर शांति और नैतिकता की दुहाई देने का दिखावा करने वाले प्रबंधक केवल झूठ की बुनियाद पर ही अपना महल खड़ा करना चाहते हैं। मजदूरों से लगातार धोखा और फरेब करने वाले प्रबंधक अपने षड्यंत्रो के माध्यम से मजदूर आंदोलन को भटकाने के प्रयास में यूनियन को तोड़ने के प्रयास मे कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।

सौरभ कुमार ने कहा कि कंपनी प्रबंधक द्वारा बार-बार मजदूर संगठन को भड़काने का प्रयास किया जाता रहा है लेकिन मजदूर अपने संयम और सूझबूझ से अभी तक समस्याओं को समाधान की ओर ले जाने का प्रयास करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। लोकतांत्रिक तरीके से एवं परंपरागत तरीके से आंदोलन को नई चुनौतियों और रणनीतियों के साथ आगे को बढ़ा रहे हैं।

ऐसी स्थिति में प्रबंधकों द्वारा उकसावे पूर्ण वातावरण का माहौल उत्पन्न करते हुए सिडकुल में अशांति फैलाने की योजना बहुत ही निंदनीय, जिसका इन्टरार्क मजदूर संगठन ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए शासन प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को संज्ञान दिलाने की कोशिश लगातार की है।

बीरेंद्र कुमार ने कहा कि 2 अगस्त को कंपनी प्रबंधन द्वारा मशीनों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया फिर से की गई जिसका मजदूरों ने विरोध किया और प्रबंधन को अपने मंसूबों में कामयाबी नहीं मिली, लेकिन अगर जल्द से जल्द कंपनी प्रबंधन की मनमानीपूर्ण रवैये व उकसावे पूर्ण कृत्यों पर शासन प्रशासन द्वारा लगाम नहीं लगाया गया तो निश्चित ही सिडकुल में अशांति का वातावरण उत्पन्न हो सकता है जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी इन्टरार्क के प्रबंधकों की होगी।

यूनियन ने बताया कि कंपनी प्रबंधक व प्रशासन की मिलीभगत से मजदूरों के ऊपर व सहयोगी साथियों के ऊपर बाल शोषण एवं बाल अधिकार हनन का मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें उच्च न्यायालय नैनीताल ने मजदूर पक्ष को स्टे देते हुए किसी भी कार्यवाही पर रोक लगा दी है जोकि मालिक व उनके सहयोगियों के मंसूबों पर पानी फेर गया और मजदूरों को संक्षिप्त जीत हासिल हुई क्योंकि कंपनी प्रबंधक अपने बुरे मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाये।

इन कठिन स्थितियों में भी मज़दूरों के हौसले बुलंद हैं और आंदोलन गतिमान है। धरना स्थल पर सैकड़ों मजदूर उपस्थित हो रहे हैं, लंगर के माध्यम से भोजन कर रहे हैं और शिफ्ट के अनुसार अपनी पाली में ड्यूटी भी जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त 2021 से इन्टरार्क मजदूर संगठन ऊधम सिंह नगर व इन्टरार्क मजदूर संगठन किच्छा के मजदूरों द्वारा कंपनी के बाहर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।

(मेहनतकश से साभार)

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