https://www.workersunity.com/wp-content/uploads/2021/07/migrant-workers-of-assam.jpg
hayan charara

“मैं हूं एक अमरीकी, मैं एपल पाई खाता हूं, मैं बेसबॉल देखता हूं” – हयान चरारा की कविता

अरबी-अमरीकी कवि हयान चरारा की परवरिश मिशिगन डेट्रायट में हुई है। उनका परिवार लेबनान से आकर अमरीका में बसा था। उनकी शिक्षा दीक्षा न्यूयार्क यूनिवर्सिटी में हुई है। वेन स्टेट …

“मैं हूं एक अमरीकी, मैं एपल पाई खाता हूं, मैं बेसबॉल देखता हूं” – हयान चरारा की कविता पूरा पढ़ें
workers resting at a shelter in Bhopal

भूख से बड़ा बागी कुछ नहीं होता इस दुनिया में!- ख़ालिद ख़ान की कविताएं

(युवा कवि ख़ालिद ए. ख़ान की ये कविताएं बग़ावती तेवर लिए हुए होती हैं। कला के लिए कला या कविता के लिए कविता चाहे अपनी जगह सही हो, लेकिन अगर …

भूख से बड़ा बागी कुछ नहीं होता इस दुनिया में!- ख़ालिद ख़ान की कविताएं पूरा पढ़ें
truck driver

पचपन बरस की मज़दूरी पेट में नहीं सीने में दुखती है

इस बरस में लोग अपने घर की छत देखते हैं उम्र की घड़ियाँ ठहरती नहीं हैं लेकिन कुछ पल लोग अपने बीते दिनों की याद में बिताते हैं अपने बच्चों …

पचपन बरस की मज़दूरी पेट में नहीं सीने में दुखती है पूरा पढ़ें
pakistan poet Atif Tauqeer @WorkersUnity

भूख गद्दार है, लफ़्ज़ गद्दार हैं, सच किसी दूसरे मुल्क का कोई जासूस है

(पाकिस्तान के जाने माने लेखक और कवि अतीफ़ तौकीर की ये नज़्म आज के वक्त को बयां करते हैं। ट्विटर पर मिली इस कविता को तर्ज़ुमा करके हिंदी में पेश …

भूख गद्दार है, लफ़्ज़ गद्दार हैं, सच किसी दूसरे मुल्क का कोई जासूस है पूरा पढ़ें