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आज से बोकारो जनरल अस्पताल के संविदा कर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल

प्रबंधन पर लगाया शोषण का आरोप, वेतन विसंगतियों और भत्तों में कटौती से है नाराजगी

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के बोकारो प्लांट प्रबंधन से संचालित बोकारो जनरल अस्पताल के संविदा कर्मी आज से तीन दिन की हड़ताल पर जाएंगे। इससे पहले 31 अक्टूबर को उन्होंने अस्पताल के सामने प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जाहिर कर प्रदर्शन किया।

जिले के प्रमुख कोविड सेंटर बने इस अस्पताल के संविदा कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें ईएसआई, भविष्य निधि, अर्जित अवकाश भत्ते और बोनस की समस्याओं से जूझने के साथ ही सुरक्षा बंदोबस्त की खातिर ये कदम उठाने को मजबूर कर दिया गया है।

कर्मचारियों का कहना है, जानलेवा महामारी के वक्त कोविड वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, क्रिटिकल केयर यूनिट, बर्न इंटेंसिव यूनिट समेत सभी चिकित्सा विभागों के जमीनी काम संविदाकर्मी ही करते हैं। चार अलग-अलग ठेकेदारों के तहत 235 संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं। हड़ताल से सेवाओं में बाधा के लिए जिम्मेदार प्रबंधन का अडिय़ल रुख है।

बीएसएल (बोकारो स्टील प्लांट) प्रबंधन और जय झारखंड मजदूर समाज (जेजेएमएस) के बीच 31 अक्टूबर को हुई पहली वार्ता बैठक बेनतीजा रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा की श्रमिक शाखा आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। दो नवंबर को भी श्रम विभाग ने मामला सुलझाने को बैठक बुलाई थी।

जेजेएमएस के महासचिव बीके चौधरी ने कहा कि बीजीएच में संविदा कर्मियों का शोषण किया जा रहा है। एक ठेकेदार जिसने 79 श्रमिकों को लगाया है, ने ईएसआई का भी लाभ नहीं दिया। इस वजह से श्रमिक और उनके आश्रित अप्रैल से ईएसआई के तहत चिकित्सा का लाभ नहीं उठा सके।

ये वे कर्मचारी हैं जो कोविड वार्ड और अस्पताल के अन्य विभागों में स्वीपर का काम कर रहे हैं। अगर बीजीएच प्रबंधन सतर्क रहे तो उन्हें नुकसान नहीं होगा। अगर हम ईएसएल सुविधा बहाल होने तक बीजीएच से मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है?, चौधरी ने कहा।

उन्होंने बताया, ठेकेदारों में से एक ने 89 श्रमिकों को 36 महीनों से अधिक समय तक बोनस और ईएल नहीं दिया है। कपड़े धुलवाने का काम करने वाले ठेकेदार ने अपने 17 श्रमिकों को अर्ध-कुशल श्रमिकों के तहत रखा है, इस तथ्य के बावजूद कि वे मशीनों का संचालन करते हैं। यही नहीं, 87 श्रमिकों का ठेकेदार लिफ्ट ऑपरेटरों को अकुशल श्रमिकों के रूप में मान रहा है। यह शोषण की पराकाष्ठा है।

मार्च से जिले में कोरोना वायरस पॉजिटिव 5306 रोगियों में से बीजीएच ने 1500 से अधिक रोगियों का लक्षणविहीन या गंभीर मामलों ने इलाज किया है। फिलहाल, कोविड वार्ड में 19 पॉजिटिव रोगियों का इलाज चल रहा है।

इस बाबत बीएसएल के कम्युनिकेशन इंजार्ज मणिकांत धन ने कहा, ‘बीएसएल प्रबंधन बीजीएच में ठेका श्रमिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। पहले से ही बीएसएल ने मुद्दों के निपटारे के लिए कई कदम उठाए हैं और उन्हें इससे अवगत कराया गया है। हम मुद्दों को हल करने के लिए सभी संबंधितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आंदोलनकारी श्रमिकों से अपनी प्रस्तावित हड़ताल को बंद करने की अपील की गई है। जिससे रोगियों को भी परेशानी न हो और बेहतर समाधान निकल सके।’

(स्रोत: द टेलीग्राफ)

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