डाईकिनः यूनियन कैसे बने, जब मैनेजमेंट नेतृत्व पर ही टूट पड़ता है

बीते रविवार को उद्योगिक क्षेत्र नीमराना के अंबेडकर पार्क में डाईकिन एयर कंडीशनिंग प्लांट नीमराना के मज़दूरों ने यूनियन गठन के संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए “मज़दूर सभा” का आयोजन किया।

सभा में डाईकिन के सैकड़ों वर्करों ने भाग लिया और अलग अलग यूनियनों, मजदूर संघठनों व ट्रेड यूनियनों ने भी यूनियन की मांग को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया।

सभा को डाइकिन से दौलत राम, मनमोहन, हौंडा टपुकड़ा से राजपाल, टोयोडा से अनिल, श्यान अल्ट्रा वायर से अमित, मारुति प्रोविजनल कमेटी से जितेंद्र, हीरो मोटोकॉर्प से भीमराव, मज़दूर सहयोग केंद्र से अमित, TUCI से सायन, एटक से कानूनी अधिवक्ता अमीन अली व अन्य मज़दूरों ने संम्बोधित किया।

पांच साल से चल रही है यूनियन बनाने की कोशिश

डाइकिन यूनियन के मजदूर लगातार 2013 से कंपनी प्रबंधन के अत्याचार और शोषण के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं।

मजदूरों द्वारा यूनियन बनाने को लेकर प्रबंधन, श्रम विभाग, सरकार की गठजोड़ से मजदूरों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

2013 में पहली यूनियन पंजीकरण पर स्थगन आदेश दिया गया था, जो केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। दूसरी यूनियन फाइल को अन्यायपूर्ण तरीके से खारिज किया गया।

अभी तीसरी फाइल पर 16 जुलाई को जयपुर हाई कोर्ट ने श्रम विभाग को 45 दिन के अंदर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

पदाधिकारियों को ही बर्खास्त कर दिया मैनेजमेंट ने

इस दौरान कंपनी ने प्रस्तावित यूनियन के महासचिव दौलत राम सहित ज्यादातर पुराने यूनियन पदाधिकारियों को कंपनी ने बर्खास्त कर दिया है।

सभा में मजदूरों ने मांग उठाया कि सभी निलंबित , बर्खास्त श्रमिकों को वापिस लिया जाए, त्रिपक्षीय समझौते को लागू किया जाए, यूनियन को मान्यता दिया जाए।

डाइकिन सहित नीमराना क्षेत्र के पूंजीपति वर्ग और सरकार को यह पता है कि डाइकिन में संघर्षशील यूनियन बनने पर पूरे औद्योगिक क्षेत्र में मज़दूर आंदोलन में नया स्थिति पैदा होगी।

यूनियन गठन, स्थायी काम और सम्मानजनक वेतन और सुविधाओं के लिए संघर्ष तेज होगा। इसलिए पूरा तंत्र आज डाइकिन में यूनियन गठन के प्रक्रिया को रोक रही है।

सभा में डाइकिन मज़दूरों ने यूनियन गठन के लिए और अधिकारों के लिए संघर्ष को तेज करने का फैसला लिया और सभी मज़दूर पक्षधर शक्तियों को संघर्ष में सहयोग करने के लिए आवेदन किया।

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