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भारत के उद्योगपतियों के ठाठ बाट ऐसे कि राजे-रजवाड़े और मुगल भी शर्मा जाएंः ओबामा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में भारतीय पूंजीपतियों पर उठाए सवाल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नई क़िताब, जिस पर राहुल गांधी के बारे में की गई टिप्पणी को लेकर हंगामा बरपा है, उसमें भारतीय पूंजीपति वर्ग के लिए बहुत तीखी टिप्पणी की गई है।

ओबामा ने हाल में आई अपनी किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में भारतीय उद्योगपतियों के बारे में लिखा है कि ‘उन्होंने ठाठ बाट में राजा रजवाड़ों और मुग़लों को भी पीछे छोड़ दिया है, जबकि इसी देश में लाखों लोग बेघर हैं।’

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अपनी मुलाकात और अनौपचारिक बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने भारतीय पूंजीपतियों को, उनके अधिक से अधिक मुनाफे की हवश पर निशाना साधा।

किताब रिलीज़ होने से पहले बहुत ही सेलेक्टिव तरीक़े से राहुल गांधी के बारे में की गई उनकी टिप्पणी सार्वजनिक कर दिया गया। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ‘ये जानबूझ कर किया गया ताकि किताब का प्रचार हो सके, क्योंकि भारत में राहुल गांधी को लेकर पहले से ही मास हिस्टीरिया पैदा की जा चुकी है, जिसमें भारत के मीडिया संस्थान अपने निजी लाभ को भुनाने के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।’

किताब में ओबामा ने लिखा है कि ‘राहुल गांधी में एक ऐसे नर्वस और अपरिपक्व छात्र के गुण हैं, जिसने कोर्सवर्क तो किया है और शिक्षक को प्रभावित करने के लिए उत्सुक भी रहता है लेकिन इस विषय में महारत हासिल करने के लिए या तो योग्यता नहीं है या फिर जुनून की कमी है। वो नर्वस लगते हैं।’

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किताब में लिखा है कि सहयोगियों के बिना हुई बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह ने उनसे कहा, ‘‘अनिश्चितता भरे वक्त में, राष्ट्रपति महोदय, धार्मिक और जातीय एकजुटता का आह्वान बहकाने वाला हो सकता है और भारत में या कहीं भी राजनेताओं के लिए इसका दोहन करना बुहत मुश्किल नहीं है।’’

ओबामा ने लिखा, ‘‘मैंने सर हिलाते हुए, प्राग यात्रा के दौरान (चेकोस्लोवाकिया के पूर्व राष्ट्रपति) वक्लाव हवेल के साथ हुई बातचीत और यूरोप में असमानता के बढ़ते प्रकोप के बारे में उनकी चेतावनी याद की। यदि वैश्वीकरण और ऐतिहासिक आर्थिक संकट अपेक्षाकृत सम्पन्न देशों में इन रूझानों को बढ़ा रहे हैं और यदि अमेरिका में भी मैं इसे टी पार्टी में देख सकता हूं तो भारत इससे कैसे बच सकता है?’’

ओबामा ने लिखा, ‘देशभर में लाखों लोग गंदगी और गलाज़त में रह रहे हैं, अकालग्रस्त गांवों या बदहाल झुग्गी-बस्तियों में जीवन बसर कर रहे हैं। वहीं भारतीय उद्योग के महारथी ऐसा जीवन जी रहे हैं कि इससे राजाओं और मुगलों को भी जलन हो जाए।’

इसके अलावा भारत-पाकिस्तान मुद्दे से लोगों को प्रभावित करने की सियासत पर ओबामा ने लिखा, ‘‘पाकिस्तान के प्रति दुश्मनी भाव व्यक्त करना राष्ट्र को एकजुट करने का सबसे आसान रास्ता है। ढेर सारे भारतीयों को इस बात पर गर्व है कि पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए देश ने परमाणु हथियार कार्यक्रम विकसित किया। उन्हें इस सच्चाई की कोई परवाह नहीं है कि किसी भी ओर से कोई चूक क्षेत्र का विनाश कर सकती है।’’

इस पुस्तक में ओबामा ने 2008 के चुनावी प्रचार अभियान से लेकर पहले कार्यकाल के अंत में एबटाबाद (पाकिस्तान) में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान तक की अपनी यात्रा का ब्यौरा दिया है। इस किताब के दो भाग हैं। पहला भाग 17 नवंबर को जारी हुआ।

अमेरिका के पहले अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने अपने कार्यकाल में दो बार 2010 और 2015 में भारत की यात्रा की थी। इसके बाद 2017 में वो भारत आए थे और उस दौरान राहुल गांधी से मुलाक़ात की थी।

(आउटलुक हिंदी की ख़बर का संपादित अंश।)

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