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एक जून से चलेंगी 200 ट्रेनें, अब राज्य सरकारों से अनुमति की ज़रूरत नहीं

रेलवे का दावा अबतक 1600 ट्रेनों के ज़रिए पहुंचाए 21.5 लाख प्रवासी मज़दूर

केंद्र की मोदी सरकार और मज़दूर सप्लाई करने वाले राज्यों की सरकारों की निर्दयता से दर दर भटकने के मज़बूर प्रवासी मज़दूरों के लिए एक राहत की ख़बर है।

भारतीय रेलवे ने स्पेशल श्रमिक ट्रेनों के अलावा एक जून से 200 स्लीपर ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इसके साथ ही अब राज्य सरकारों से अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं होगी।

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे मज़दूरों के लिए राहत की बात बताई है और कहा है कि अब निजी तौर पर इन ट्रेनों के ज़रिए भी मज़दूरों को उनके शहर भेजा जा सकेगा।

रेलवे के ट्वीट के अनुसार, ‘इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के अतिरिक्त भारतीय रेल एक जून से प्रतिदिन 200 अतिरिक्त टाइम टेबल ट्रेनें चलाने जा रहा है जो कि सामान्य द्वितीय श्रेणी की ट्रेनें होंगी और इनकी बुकिंग ऑनलाइन ही उपलब्ध होगी। ट्रेनों की सूचना जल्द ही उपलब्ध कराई जाएगी।’

रेलवे ने एक अन्य ट्वीट में कहा था कि अब तक कुल 1600 ट्रेनों के माध्यम  से लगभग 21.5 लाख प्रवासी मज़दूरों को उनके गृह जनपदों तक पहुंचाया जा चुका है।

प्रवासी मज़दूरों का बड़े पैमाने पर पलायन देखते हुए मोदी सरकारों और राज्य सरकारों ने उन्हें परोक्ष रूप से रोकने की कोशिश भी की। यहां तक कि कर्नाटक की भाजपा सरकार ने तो अनुमति देने के बाद ट्रेनें रद्द कर दी थीं।

लेकिन स्पेशल ट्रेनों के अलावा सामान्य टाइम टेबल वाली इन ट्रेनों के लिए राज्य सरकारों से अनुमति की ज़रूरत भी ख़त्म कर दी गई है।

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार, गृह मंत्रालय ने प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के लिए इन ट्रेनों को चलाने के वास्ते रेलवे के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का निर्देश जारी किया है।

रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेई के हवाले से एनडीटीवी ने कहा है, ‘श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए उन राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है जहां यात्रा समाप्त होनी है।’

उन्होंने कहा, ‘नई एसओपी के बाद उस राज्य की सहमति लेना अब आवश्यक नहीं है जहां ट्रेन का समापन होना है।’

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