प्रोफ़ेसर रूप रेखा वर्मा, आपको तहे दिल से सैल्यूट !

By पुष्प रंजन

उम्र कितनी है? 79 साल, इस उम्र में अधिकांश लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं।लखनऊ यूनिवर्सिटी की वाइसचांसलर रह चुकी हैं रूप रेखा वर्मा, 1964 से 2003 तक लखनऊ विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र की विभागाध्यक्ष थीं। उस कालखंड में इनके अधीन 50 से अधिक शोध हो चुके थे।

वीसी की ज़िम्मेदारी से अवकाशप्राप्ति के बाद रूप रेखा वर्मा महिलाओं की आवाज़ बनीं। समाज में समरसता बने, इस वास्ते डॉ. रूप रेखा वर्मा सड़क पर उतर आती हैं। लोगों को समझाने, और परचा बाँटने में इनके आड़े ‘स्टेटस सिम्बल’ नहीं आता।

आज वही रूप रेखा वर्मा एक पत्रकार के वास्ते उठ खड़ी हुई हैं। केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन अब भी जेल में हैं, क्योंकि उन्हें यूपी में रहने वाले दो जमानतदार चाहिए। रूप रेखा वर्मा उन्हें जानती तक नहीं, मगर बेहिचक अपनी सेलेरियो गाड़ी के पेपर्स जमा कराये, और जमानतदार बनने की पहल की है।

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दिल्ली में काम करने वाले केरल के एक पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को हाथरस जाते वक्त अक्टूबर, 2020 में गिरफ्तार कर लिया गया था। कप्पन, एक पत्रकार के तौर पर दलित किशोरी के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटना को कवर करने के लिए उत्तर प्रदेश के हाथरस जा रहे थे। लंबी लड़ाई के बाद इस साल 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के “अभिव्यक्ति की आजादी” के अधिकार पर जोर देते हुए उन्हें जमानत दे दी थी।

कप्पन अभी 26 सितंबर तक जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे क्योंकि लखनऊ की सत्र अदालत ने एक अन्य मामले में केरल पत्रकार को जमानत देने से मना कर दिया था। ये मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया था। कप्पन पर आरोप है कि उन्होंने हवाला के ज़रिये 45 हज़ार रूपये मंगाए थे।

कप्पन कथित तौर पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो नेताओं के साथ एक कैब से हाथरस जा रहे थे। हाथरस मामले में यूपी सरकार ने कप्पन और अन्य पर राजद्रोह (आईपीसी धारा 124 ए), समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने (153 ए), धार्मिक भावनाओं को आहत करने (295 ए), आतंकवाद विरोधी कानून (यूएपीए), और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी) के तहत मामला दर्ज किया था।

(फेसबुक पोस्ट से साभार)

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