खेतिहर, ग्रामीण मज़दूरों के लिए बढ़ी महंगाई, मई में दरें 6.67% से बढ़कर 7% हुई

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“सखी सइयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाये जात है” – पीपली लाइव फिल्म का ये गाना श्रम मंत्रालय द्वारा जारी महंगाई रिपोर्ट पर बिलकुल सटीक बैठता नजर आरहा है।

देश में महंगाई की चौतरफा मार पड़ रही है और अब इसका सबसे ज्यादा असर खेतिहर – ग्रामीण मजदूर पर हो रहा है।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक मई के महीने में खेतिहर मजदूर के लिए खुदरा महंगाई दर 6.44 फीसदी से बढ़कर 6.67 फीसदी हो गयी है।

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वहीं ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा महंगाई दर 6.67 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी पर आ गयी है।

श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक खाने पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर खेतिहर मजदूरों के लिए 5.29 फीसदी से बढ़कर 5.44 फीसदी और ग्रामीण मजदूरों के लिए 5.35 फीसदी से बढ़कर 5.51 फीसदी पर आ गयी है।

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ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI-AL) के मुताबिक मई, 2022 में खेतिहर मजदूरों के लिए मुद्रास्फीति 11 प्वाइंट बढ़कर 1119 और ग्रामीण मजदूरों के लिए 12 प्वाइंट बढ़कर 1131 प्वाइंट पर आ गयी है।

दरअसल एग्रीकल्चर लेबर और ग्रामीण मजूदरों के लिए इंडेक्स के मुताबिक चावल, गेंहू-आटा, ज्वार, बाजरा, दूध, मीट-गोट, फ्रेश-ड्राई मछली, चिली ड्राई, सब्जी-फल और मसालों के दामों में बढ़ोतरी देखी गई है।

देश के सभी राज्यों में अलग अलग महंगाई दर मापी गयी है।

तमिलनाडु 1294 प्वाइंट के साथ सबसे ऊपर है जबकि हिमाचल प्रदेश 883 प्वाइंट के साथ सबसे नीचे है।

ग्रामीण मजदूरों के मामले में 20 राज्यों में 1 से 19 प्वाइंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इससे पहले मई के महीने में थोक महंगाई दर 15.88 फीसदी रही है। जबकि अप्रैल के महीने में 15.08 फीसदी रही थी।

थोक महंगाई दर में ये इजाफा मुख्य रूप से खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ने की वजह से देखने को मिल रहा है।

तो इस दौरान ईंधन और बिजली की थोक महंगाई दर में भी इजाफा हुआ है। मई के महीने में खुदरा महंगाई दर ( Consumer Price Index) में कमी आई है। यह दर 7.04 फीसदी ही रह गयी है जबकि अप्रैल में 7.79 फीसदी पर थी।

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