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मेदांता, फ़ोर्टिस जैसे निजी आस्पतालों को अधिग्रहित करने की मांग तेज़

मज़दूर संगठनों ने गुड़गांव के लघु सचिवालय पर किया प्रदर्शन

By खुशबू सिंह

कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और निजी अस्पतालों की मनमानी को लेकर जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।

निजी अस्पतालों की मनमानी के ख़िलाफ़ गुड़गांव में सामाजिक कार्यकर्ताओं और मज़दूर संगठनों ने लघु सचिवालय पर पदर्शन किया और अस्पतालों को तुरंत अधिग्रहित करने की मांग की है।

मज़दूर संगठनों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर, मैक्स, फोर्टिस, मेदांता और अपोलो जैसे सभी निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों का अधिग्रहण कर इन्हें देश अपने हाथ में लेने की मांग की।

इसके साथ ही जिन्होंने सरकारी स्वास्थ्य व्यस्थावों को पूरी तरह चौपट कर दिया है, उन पर कड़ी कार्यवाही होनी करने की मांग की है।

कोरोना संकट के दौर में स्वास्थ्य सावाओं की माली हालत को देखते हुए, वक्ताओं ने कहा कि कोरोना काल में देश की स्वास्थ्य व्यस्थाओं की पोल खुल गई है।

निजी अस्पतालों में लूट

ग़रीब जनता परेशान है, निजी अस्पताल मरीजों की लाशों पर मोटी कमाई कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कोरोना के इलाज के मामले में पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने निजी प्रयोगशालाओं को महंगे दाम पर टेस्ट करने की इजाज़त दी उसके बाद निजी अस्पतालों को भी इलाज़ की हरी झंडी दे दी है।

अभी हाल ही में दिल्ली के निजी अस्पतालों ने भारी भरकम फ़ीस वाले अपने रेट कार्ड जारी किए हैं। कई मरीजों ने शिकायत की है कि निजी अस्पताल पांच पांच लाख रुपये एडवांस देने पर भी बेड की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा, “इसका विरोध आम जनता को करना चाहिए और इसके लिए हम सभी को आगे आना पड़ेगा।”

विरोध प्रदर्शन में इंक़लाबी मज़दूर केंद्र, मज़दूर सहयोग केंद्र, स्वराज इंडिया और बेलसोनिका यूनियन के प्रतिनिधि शामिल थे।

अस्पतालों पर परिजनों को लूटने के आरोप

कुछ दिन पहले ही मुकेश असीम ने अपनी एक पोस्ट में लिखा था कि त्रेहन, देवी शेट्टी जैसे लोग अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं पर इन्होंने मुनाफ़े वाले निजी अस्पताल चलाये हैं, पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में कुछ नहीं किया।

उन पर कई मरीज़ों ने बंधक बनाकर पैसा उगाहने और केस बिगाड़कर मरीज़ों के परिजनों को लूटने के भी आरोप लगे हैं।

ऊपर से रामदेव, जग्गी, श्री श्री जैसे आध्यात्मिक लोगों को चैनलों पर ‘ज्ञान’ परोसने के लिए बुलाया जा रहा है।

इन ‘मुनाफ़ाख़ोरों और ठगों’ की बजाय संक्रामक रोगों के डॉक्टर, कम्यूनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ और पब्लिक हेल्थकेयर के जानकारों को चैनल वाले क्यों नहीं बुला रहे हैं? मोदी सरकार की आपराधिक लापरवाही का भेद खुल जाएगा इसलिए?

यही वक़्त है जब पूरे देश की स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों से छीन लेना चाहिए और सबके इलाज़ को पूरी तरह फ्री कर देना चाहिए।

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