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हरियाणा सिलेक्शन कमिटी ने 10 सालों से काम कर रहे 1983 पीटी शिक्षकों को नौकरी से किया बर्खास्त

बर्खास्त किए गए शिक्षकों में अधिकांश लोग राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी और गोल्ड मेडलिस्ट हैं।

By खुशबू सिंह

हरियाणा सरकार के अंतर्गत स्थाई तौर पर पिछले 10 सालों से पीटी टीचर के रुप में काम करने वाले 1983 शिक्षकों को हरियाणा सिलेक्शन कमिटी ने व्हाटसअप के जरिए 8 अप्रैल को नोटीस भेज कर नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।

पिछले 42 दिन से सभी शिक्षक हरियाणा के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं। इन शिक्षकों की मांग है कि इन्हें दोबारा काम पर बहाल किया जाए।

इसी तरह का एक प्रदर्शन हरियाणा शारीरिक शिक्षक संघर्ष समिति द्वारा गुड़गांव के डीसी ऑफिस के बाहर  किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में करीब 50 लोग शामिल हैं।

गुड़गांव के डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रही गोल्ड मेडलिस्ट रजनी बताती हैं, “2006 में सरकारी विज्ञापन के द्वारा 200 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें से 1983 लोगों का सिलेक्शन 2010 में हुआ। जिन लोगों का सिलेक्शन नहीं हुआ उन लोगों ने चंडीगढ़ हाई कोर्ट में 1983 लोगों के खिलाफ याचिका दायर कर दी।”

वो आगे कहती है, “जांच के दौरान पता चला कि हमारा सिलेक्शन गलत तरीके से हुआ था। यही बात हाई कोर्ट और सुप्रिम कोर्ट ने भी कही। हाई कोर्ट ने हरियाणा सिलेक्शन कमिटी को आदेश दिया की लॉकडाउन के बाद पांच महीने के भीतर इन सभी शिक्षकों की भर्ती सही तरीके से की जाए “।

रजनी कहती हैं,  “एक साज़िश के तहत हमें हमेशा के लिए नौकरी से निकाल दिया। हम लोग राजनीति के शिकार हुए हैं।”

रजनी बताती हैं, जब कि हाई कोर्ट ने कहा था कि शिक्षकों में कोई खामी नहीं है। बस इनकी सिलेक्शन प्रक्रिया गलत तरह से हुई है”।

आप को बता दे कि नौकरी से महिला पुरूष दोनों को बर्खास्त किया गया है। इन में कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके घर में छोटे-छोटे बच्चें हैं। पति बीमार है और वे महिलाएं अपनी नौकरी को पाने के लिए पिछले 42 दिन से कोरोना काल में प्रदर्शन कर रहीं हैं।

संतोष नाम की एक महिला शिक्षक ने वर्कर्स यूनिटी को बताया कि, “मेरे पति बिस्तर से उठ नहीं सकते हैं। उन्हें दमा की बीमारी है। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। पर नौकरी को दोबारा पाने के लिए परिवार को  छोड़कर लड़ रही हूंं।”

प्रदर्शन में शामिल अधिकांश शिक्षक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं और देश के लिए खिलाड़ी तैयार करते हैं।

सरकार ने इन लोगों को निकालने से पहले एक बार भी नहीं सोचा और नाही तो सरकार की तरफ से कोई आश्वासन दिया जा रहा है कि इन लोगों को कब नौकरी पर बहाल किया जाएगा।

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