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आपातकाल नहीं है कि मज़दूर अधिकारों को रद्द किया जाए, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया गुजरात सरकार का आदेश

लॉकउन में श्रम क़ानून स्थगित करने के गुजरात सरकार के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया

लॉकडाउन के दौरान मज़दूरों को ओवर टाइम देने से कंपनियों को छूट देने वाले गुजरात सरकार के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि महामारी कोई ऐसी आंतरिक आपातकाल नहीं है जिससे दश की सुरक्षा को ख़तरा हो। इसलिए गुजरात सरकार मज़दूरों के अधिकारों को निलंबित नहीं कर सकती।

गुजरात मज़दूर सभा और ट्रेड यूनियन सेंटर्स ऑफ़ इंडिया की ओर से गुजरात सरकार के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वो लॉकडाउन के दौरान ओवरटाइम मज़दूरी का भुगतान करे।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण, इंदू मल्होत्रा और केएम जोसेफ़ ने फ़ैसला दिया कि महामारी उन संवैधानिक अधिकारियों को रद्द करने का कारण नहीं हो सकता, जिससे मज़दूरों के सम्मान और उनकी उचित मज़दूरी की गारंटी सुनिश्चित होती है।

अदालत ने कहा कि “आर्टिकिल 21 के तहत मज़दूरों सहित हर व्यक्ति को जीने का अधिकार हासिल है और काम के मानवीय हालात बदतर होते हैं तो सामाजिक और आर्थिक आज़ादी में बराबरी का अवसर ख़त्म हो जाएगा। मज़दूरों के जीने के अधिकार को नियोक्ता या सरकार की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार द्वारा जारी आदेश, क़ानून द्वारा दिए गए मानवीय काम के हालात और ओवरटाइम वेतन के अधिकार को नकारता है। इसलिए यह मज़दूरों के जीने के अधिकार और बंधुआ मज़दूरी के उन प्रवाधानों के ख़िलाफ़ है जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 में नागिरकों को दिए गए हैं।”

गुजरात सरकार के आदेश में फ़ैक्ट्रीज़ एक्ट के तहत काम के घंटे और अन्य सुविधाओं के बारे में फ़ैक्ट्रियों को छूट दी गई थी।

श्रम क़ानूनों में ढील दिए जाने के गुजरात सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

फ़ैसला पढ़ते हुए जस्टिस चंद्रचूर्ण ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान आर्थिक मंदी से फ़ैक्ट्रियों को आने वाली आर्थिक दिक्कतों के बारे में कोर्ट को पता है। लेकिन आर्थिक मंदी का भार सिर्फ वर्करों पर नहीं डाला जा सकता, जो आर्थिक गतिविधि की रीढ़ हैं।

बीते अप्रैल में देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान गुजरात सरकार ने एक नोटिफ़िकेशन जारी करते हुए 20 अप्रैल से 19 जुलाई के बीच फ़ैक्ट्रीज़ एक्ट के कुछ प्रावधानों से फ़ैक्ट्रियों को छूट दे दी थी।

ये नोटिफ़िकेश फ़ैक्ट्रीज़ एक्ट के सेक्शन 5 के तहत राज्य सरकार ने अपना अधिकार इस्तेमाल करते हुए जारी किया था। इस सेक्शन में राष्ट्रीय आपातकाल जिसमें देश की सुरक्षा को ख़तरा हो, उसी हालात में सरकार इस अधिकार का उपयोग कर सकती थी।

याचिकाकर्ता टीयूसीआई ने कहा है कि फ़ैक्ट्रीज़ एक्ट के सेक्शन 51, 54, और 56 से फ़ैक्ट्रियों को छूट देने से फ़ैक्ट्रियां एक दिन में वर्करों से 12 घंटे, हफ़्ते में 72 घंटे काम करा सकती थीं और छह घंटे के अंतराल पर उन्हें 30 मिनट का ब्रेक दिया जाता।

गुजरात सरकार ने इस नोटिफ़िकेशन के साथ ही डबल ओवर टाइम को भी रद्द कर दिया था, जिसका मतलब था कि ओवर टाइम की मज़दूरी सिंगल रेट पर तय होती।

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