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वर्कर्स यूनिटी क्राउड फंडिंग में 41 दिनों में 1 लाख 15 हज़ार रु., मिलाप ने फ़ीस माफ़ की

180 दिनों में 10 लाख रुपये इकट्ठा करने का लक्ष्य, 24x7 न्यूज़ रूम स्थापित करने का लक्ष्य

वर्कर्स यूनिटी क्राउड फंडिंग कर रही वेबसाइट मिलाप ने अपनी फ़ीस माफ़ कर दी है, यानी अब किसी भी आर्थिक मदद पर वेबसाइट चार्ज नहीं करेगी।

वर्कर्स यूनिटी ने अपने लक्ष्य के दसवें हिस्से को हासिल कर चुका है और आर्थिक मदद का आना अभी भी जारी है।

समर्थकों और मज़दूरों की मदद से 41 दिनों में वर्कर्स यूनिटी अबतक क़रीब एक लाख 13,000 रुपये जुटाने में कामयाब रहा है।

जुलाई के प्रथम सप्ताह में क्राउड फंडिंग वेबसाइट मिलाप के ज़रिए आर्थिक मदद जुटाने का अभियान शुरू किया गया था और 180 दिनों में क़रीब 10 लाख रुपये इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया था।

वेबसाइट के मार्फत अबतक 137 लोगों ने कुल 83,118 रुपये की मदद की है जबकि सीधे क़रीब 30,000 रुपये की मदद मिली है।

मिलाप की वेबसाइट को देखने से पता चलता है कि मिलाप पर 100 लोगों ने 1 रुपये 10 रुपये, 50, 100, 200 रुपये का योगदान किया जबकि 37 लोगों ने हज़ार या इससे अधिक का योगदान किया।

वर्कर्स यूनिटी पिछले दो सालों से सतत मज़दूरों के मुद्दों को उठाता रहा है और इस दौरान कुछ यादगार ज़मीनी रिपोर्टिंग की है। मज़दूर वर्ग के प्रति अपनी पक्षधरता से वर्कर्स यूनिटी ने एक प्रतिबद्ध पाठक वर्ग को बनाया है जो उसकी ख़बरों पर भरोसा करते हैं और प्रेरित होते हैं।

यही कारण रहा कि प्रवासी मज़दूरों के संकट के दौरान मदद का अभियान चलाने का हौसला मिला और इसे आजमाने का मौका मिला कि वर्कर्स यूनिटी सिर्फ मज़दूरों की आवाज़ बुलंद नहीं करता बल्कि उनके दुख सुख का बराबर का भागीदार भी है।

वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन से मज़दूरों की मदद

जब कोरोना के कारण 23 मार्च 2020 को मोदी सरकार ने अचानक लॉकडाउन की घोषणा की तब वर्कर्स यूनिटी की टीम सीमित संसाधनों के साथ मज़दूरों की मदद में वर्कर्स यूनिटी हेल्पलाइन के ज़रिए मदद की शुरुआत की।

क़रीब दो महीने तक सड़क पर जा रहे प्रवासी मज़दूरों और जहां तहां फंसे मज़दूरों की हर संभव मदद करने, राशन पहुंचाने से लेकर उन्हें घर पहुंचाने तक में मदद की।

इस दौरान नागरिक समाज, तमाम मज़दूर संगठन, छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक समुदाय ने वर्कर्स यूनिटी पर भरोसा जताया और फंड की कमी नहीं होने दी। इस पूरे अभियान में साढ़े आठ लाख रुपये इकट्ठा हुए थे जिनसे मदद की जा सकी।

लेकिन इस दौरान वर्कर्स यूनिटी के अपने संसाधन भी खर्च हुए और सब जोड़ दिया जाए तो तक़रीबन 10 लाख रुपये इस पूरे अभियान में खर्च हुए थे।

इसका नतीजा ये हुआ कि वर्कर्स यूनिटी की आर्थिक हालत थोड़ी मुश्किल में पड़ गई, जिसके लिए अपने पाठकों, समर्थकों, चाहने वालों से एक कोष बनाने का आह्वान करना पड़ा।

एक और बात थी, जिसके लिए फंड जुटाने का अभियान हाथ में लेना पड़ा। असल में बिना किसी बाहरी फंड के भी वर्कर्स यूनिटी को दो साल से चलाने की कोशिश हो रही थी।

24×7 न्यूज़ रूम की स्थापना का लक्ष्य

इन आर्थिक तंगियों में भी इसे इसी हालत में चलाये रखा जा सकता है लेकिन अब एक 24×7 न्यूज़ रूम की स्थापना की ज़रूरत है, ताकि वर्कर्स यूनिटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाया जा सके।

अभी भी वर्कर्स यूनिटी बहुत सीमित ख़बरें दे पाता है, लेकिन अब जबकि श्रम क़ानूनों पर हर रोज़ हमले हो रहे हैं, मज़दूर वर्ग हर रोज़ प्रताड़ित किया जा रहा है, उनकी आवाज़ बुलंद करने में हम खुद को साधनविहीन पा रहे हैं।

वर्कर्स यूनिटी का शुरू से ही लक्ष्य रहा है कि मेहनतकश वर्ग का एक सशक्त मीडिया खड़ा किया जाए, कम से कम देश भर के तमाम भाषा भाषी आबादी के बीच एक पुल का काम किया जाए।

इसके लिए हमें अन्य भाषाओं में भी वेबसाइट लानी होगी, मज़दूर वर्ग पर केंद्रित अन्य वेबसाइटों को सहयोग देकर उन्हें बढ़ावा देना होगा, इसके लिए एक सुगठित टीम की ज़रूरत है।

इन्हीं उद्देश्यों को हासिल करने के लिए ये फंड जुटाने का अभियान चलाया जा रहा है। अभी भी 139 दिन बचे हैं और हमारे लक्ष्य के अनुसार, आठ लाख रुपये इकट्ठा किए जाने हैं।

बीते दिनों में जिस तरह वर्कर्स यूनिटी के चाहने वालों ने उत्साह दिखाया है, हम उम्मीद करते हैं कि देखने में भले ही बड़ा लक्ष्य हो, हम इसे हासिल कर लेंगे।

उन सभी लोगों को शुक्रिया जिन्होंने वर्कर्स यूनिटी में भरोसा जताया। साथ ही एक अपील और कि इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करें।

(वर्कर्स यूनिटी स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया के उसूलों को मानता है। आप इसके फ़ेसबुकट्विटर और यूट्यूब को फॉलो कर इसे और मजबूत बना सकते हैं। वर्कर्स यूनिटी के टेलीग्राम चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें।)

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