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रोजगार छीनने के बाद अब यूपी की जनता को ‘बिजली के झटके’ देने की तैयारी

उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन ने दरों के 80 के स्लैब को कम कर 53 करने की सिफ़ारिश की है

उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन बिजली दरों के स्लैब को बदलने की तैयारी कर रहा है। इस बात का खुलासा बिजली नियामक आयोग को गोपनीय तरिके से भेजे गए पत्र द्वारा हुआ है।

पत्र में बिजली दरों के स्लैब को बदलने के लिए कहा गया है। इसमें तात्कालिक 80 के स्लैब को कम कर 53 करने के संकेत दिए गए हैं।

एक आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बिजली की दरों के स्लैब में तब्दीली करने से बिजली का बिल 3 से 4 फ़ीसदी बढ़ सकता है।

स्लैब में तब्दीली का सीधा असर किसान, आम ग़रीब जनता की जेब पर पड़ेगा, जो पहले ही सरकार की नीतियों की मार झेल रही हैं।

इसमें शहरी घरेलू के लिए 3 स्लैब और बीपीएल को छोड़कर वाणिज्यिक, लघु और छोटे उद्योगों के लिए 2 स्लैब बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

वहीं बड़े उद्योग के स्लैब में कोई तब्दीली न करने का फैसला लिया गया है। यानि स्लैब के बदलाव में इन्हें कोई मार नहीं झेलनी पड़ेगी।

स्लैब में तब्दीली करनी है या नहीं इस बात का आखरी फैसला नियामक आयोग करेगe।

तात्कालिक में घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए चार स्लैब हैं, जिन्हें तीन स्लैब में कम करने का सुझाव भेजा गया है।

इसी तरह, वाणिज्यिक विभाग में 2 किलोवाट के जगह पर 4 किलोवाट का एक नया स्लैब तैयार किया गया है।

इसमें ग्रामीणों को दिए जाने वाले स्लैब को घटाया जा सकता है और शहरी बिजली के दो स्लैब नियम द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं।

उद्योगों का भार जनता पर

वहीं बिजली दरों के स्लैब में तब्दीली को लेकर अभी से विरोध शुरू हो गया है।

वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद ने कहा है कि, “पब्लिक सेक्टर की राज्य व केंद्रीय परियोजनाओं से बहुत सस्ती बिजली मिल रही है। लेकिन कॉर्पोरेट बिजली उत्पादन कंपनियों से लागत के सापेक्ष मंहगी दरों पर बिजली खरीदने से ही उपयोगकर्ता परेशान हैं।”

उनके अनुसार, “कॉर्पोरेट बिजली उत्पान करने वाली कंपनियां जमकर मुनाफा कमा सके और आम जनता को लूट सके इसलिए, सरकार ने उनसे मंहगी बिजली खरीदने का फैसला किया है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि, “पब्लिक सेक्टर की परियोजनाओं की उपेक्षा और उन्हें बर्बाद किया जा रहा है जबकि कॉर्पोरेट बिजली कंपनियों को सस्ते दर से जमीन, लोन से लेकर तमाम सुविधाएं सरकार दे रही है।”

गौरतलब है कि योगी सरकार एक साल के भीतर दो बार बिजली के दारों में इज़ाफ़ा कर चुकी है। यदि स्लैब में बदलाव किया जाता है तो बिजली महंगी होने की आशंका है।

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