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पंजाब में ज़हरीली शराब पीने से 86 लोगों की मौत, 25 संदिग्ध गिरफ़्तार

सबसे अधिक मौतें माजा इलाक़े में, मृतकों के परिजनों को मुआवज़े की घोषणा

एक बार फिर पंजाब में ज़हरीली शराब ने मौत का तांडव मचाया है। ज़हरीली शराब पीने के कारण 86 लोगों की मौत हो गई है।

बीबीसी पंजाबी की ख़बर के अनुसार, मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।

सबसे ज्यादा मौतें ताराम तारन, अमृतसर और गुरदासपुर जिलों में हुईं। तरनतारन में सबसे ज्यादा मौतें हुईं।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आबकारी और कराधान विभाग के छह अधिकारियों और छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इसमें दो डीएसपी और चार एसएचओ शामिल हैं और उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

पुलिस ने मामले में अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 100  जगहों पर छापेमारी की है।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमृतसर, बटाला और तरनतारन में अब तक 70 लोगों की संदिग्ध मौतों की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास आबकारी विभाग है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मृतकों के परिवारों के लिए दो लाख रुपये के मुआवजे की भी घोषणा की है।

ज़हरीली शराब पहले भी पंजाब में कई लोगों की जान ले चुकी है। 2010 में , दसुआ में ज़हीरी शराब से 16 लोग मारे गए थे और दो दर्जन से अधिक बीमार हो गए थे।

2012 में , गुरदासपुर के नांगल जोहल और बलोवाल गाँवों में जहरीली शराब फिर से मौत का तांडव बन गई और यहां 18 लोगों की जान गई।

ज़हरीली शराब से आम तौर पर ग़रीब, मेहनतकश वर्ग प्रभावित होता है और ग़रीबी बेरोज़गारी में सस्ते नशे के चक्कर में वे अपनी जान गवां बैठते हैं।

लेकिन जब भी ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं, मौजूदा सरकारों पर सवाल उठाए जाते हैं। इस समय जब ये घटना घटी है, सूबे के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह के पास ही आबकारी विभाग है।

अमरेंद्र सिंह पंजाब में कांग्रेस के चहेते  चेहरा हैं और उनके विभाग में उनकी नाक के नीचे ज़हरीली शराब का अवैध कैसे पनप रहा है, इसका जवाब कौन देगा।

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