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आखिरकार मारुति, हीरो, होंडा समेत कंपनियों ने दी वर्करों को छुट्टी

राजस्थान, उत्तराखंड समेत यूपी के कई ज़िलों में लॉक डाउन, ऑफ़िस फ़ैक्ट्री 31 मार्च तक शट डाउन

कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते आख़िरकार मारुति प्रबंधन को चौतरफ़ा दबाव में आते हुए गुड़गांव और मानेसर के अपने सभी प्लांटों में प्रोडक्शन बंद करने का फै़सला लेना पड़ा।

इसके साथ ही गुड़़गांव और मानेसर में दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां हीरो मोटोकॉर्प और होंडा स्कूटर्स एंड मोटरसाइकिल ने भी 31 मार्च तक प्रोडक्शन बंद करने का फैसला किया है।

राजस्थान में सभी फ़ैक्ट्रियां, प्लांट और कार्यालय पहले ही 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिए गए हैं।

मारुति सुजुकी मज़दूर संघ ने एक बयान जारी कर कहा है कि ‘गुड़गांव डीएम ने पूरे शहर को लॉकडाउन करने का आदेश जारी किया है।   इस संदर्भ में यूनियन, प्रबंधन व प्रशासन की मीटिंग 21 मार्च से चल रही थी।’

बयान के अनुसार, ‘मद्देनजर मारुति सुजुकी ग्रुप के सभी प्लांटों में 23 मार्च 2020 से अग्रिम आदेश तक उत्पादन नहीं होगा।’

इसमें कहा गया है कि कुछ ज़रूरी सेवाएँ पहले की तरह चालू रहेंगी और जिनकी ज़रूरत होगी उन्हें सूचना दी जाएगी।

नोएडा ग़ाज़ियाबाद में 31 मार्च तक लॉक डाउन, फ़ैक्ट्रियां और ऑफ़िस बंद

नोएडा गाजियाबाद में कम्प्लीट लॉकडाउन। इरिक्शन जैसी कुछ फ़ैक्ट्रियों में प्रोडक्शन जारी रहने पर वर्करों का हंगामा। नोएडा सेक्टर 62 और ग़ाज़ियाबाद को बांटने वाले नेशनल हाईवे एनएच-24 से लाईव।#CoronaVirus #JantaCurfew #Noida #कोरोनावायरस #जनताकर्फ्यू #नोएडा

Posted by Workers Unity on Sunday, March 22, 2020

प्रोडक्शन बंद करने में हिचकिचाहट

ज्ञात हो कि वर्कर्स यूनिटी ने शनिवार को इस बारे में ख़बर प्रकाशित की थी जिसमें मारुति प्रबंधन ने प्रोडक्शन बंद करने और मज़दूरों को छुट्टी देने से इनकार कर दिया है।

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड कंपनी प्रशासन पर लगातार दबाव बना था कि प्रोडक्शन बंद न हो। इस बारे में शनिवार को मारुति सुजुकी मज़दूर संघ की प्रबंधन से बात हुई थी।

जबसे करोना का ख़तरा बढ़ा है, मज़दूर यूनियनों का प्रबंधन पर दबाव बन रहा था कि प्रोडक्शन बंद कर मज़दूरों को छुट्टी दी जाए और उनके स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बरती जाए।

लेकिन रविवार तक कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों, मज़दूरों को काम पर बुलाया।

ऐसा ही एक मामला नोएडा के सेक्टर 62 स्थित एरिक्सन कंपनी का सामने आया जिसमें कर्मचारियों को रविवार को घोषित जनता कर्फ्यू के बावजूद काम पर बुलाया गया।

जब कर्मचारियों ने ऐतराज जताया और पुलिस को फ़ोन किया तो प्रबंधन हरकत में आया।

आठ लाख की आबादी पर एक अस्पताल, सिर्फ 5 आइसोलेशन बेड

कोरोना और उससे लड़ने की ऐसी तैयारियां हैं झारखंड के लातेहार में।लातेहार ज़िला अस्पताल से लाईव Abhinav Kumar

Posted by Workers Unity on Saturday, March 21, 2020

31 मार्च तक लॉकडाउन

कर्मचारियों का आरोप है कि पूरे नोएडा में लॉकडाउन और जनता कर्फ्यू के बावजूद कंपनी बंद नहीं हुई और जब पुलिस को बुलाया गया तो वो प्रंबधन के साथ बातचीत कर वापस चली गई, कोई कार्यवाही नहीं हुई।

लेकिन कुछ अपवाद छोड़ दें वर्कर्स यूनिटी की पड़ताल में नोएडा और ग़ाज़ियाबाद में लगभग सारी फ़ैक्ट्रियां, प्लांट, सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहे।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ज़रूरी सेवाओं को छोड़कर 31 मार्च तक यही स्थिति जारी रहने वाली है।

इस बीच उत्तराखंड और राजस्थान में लॉक डाउन के साथ 31 मार्च तक सभी कारखाने बंद करने के निर्देश जारी हुए हैं।

राजस्थान में जयपुर स्थित बोस कंपनी ने एक सूचना जारी कर 31 मार्च तक बंदी की बात कही है और कहा है कि एक अप्रैल से कंपनी में प्रोडक्शन फिर से शुरू किया जाएगा।

कंपनी के बयान में कहा गया है कि प्रबंधन और कार्यालयी काम देखने वाले कर्मचारियों को इस दौरान वर्क फ्राम होम करना होगा, खासककर उनके लिए जिनके पास लैपटॉप है।

क्या मजदूर वर्ग कोरोना वायरस प्रूफ है?

क्या मजदूर वर्ग कोरोना वायरस प्रूफ है? फ़ैक्ट्रियां क्यों नहीं बंद की गईं, मज़दूरों को मास्क और सैनेटाइज़र कंपनियां क्यों नहीं दे रही हैं? मज़दूरों को पेड लीव क्यों नहीं दी जा रही है? अगर भारत में ये बीमारी फैली तो मज़दूर वर्ग का एक बड़ा हिस्सा चपेट में आएगा। सरकार मज़दूरों को लेकर क्यों नहीं चिंतित है? देखिए मेडिकल डेटा रिसर्च एक्सपर्ट के साथ बातचीत।#CoronaVirus #Covid19 #कोरोनावायरस #कोविड19

Posted by Workers Unity on Saturday, March 14, 2020

कई अन्य प्रदेशों में बंदी

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 22 मार्च से लेकर 31 मार्च तक औद्योगिक नगरी नोएडा, ग़ज़ियाबाद, मेरठ समेत 15 ज़िलों में पूरी तरह लॉकडाउन का आदेश जारी कर दिया है।

हालांकि फिलहाल ये लॉकडाउन केवल 31 मार्च तक का है लेकिन जिस तेज़ी से भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है उसे देखते हुए अप्रैल का महीना भी सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहा है।

ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है कि जबतक ख़तरा पूरी तरह टल नहीं जाता, कंपनियों को प्रोडक्शन जारी रखने देना ख़तरे से खाली नहीं है।

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