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निसिन ब्रेक कंपनी मज़दूरों को वापस रखने को नहीं है तैयार, मज़दूर आत्मदाह करने को हैं मज़बूर

कंपनी प्रबंधन मज़दूरों को मई माह का बकाया वेतन देने के लिए राजी हो गया लेकिन काम पर  रखने को तैयार नहीं है।

राजस्थान के नीमराना में स्थित स्पेशल जापानी औद्योगिक क्षेत्र निसिन ब्रेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने 27 ट्रेनी मज़दूरों को अवैध तरीके से बिना किसी नेटिस के  काम से निकाल दिया है। साथ ही मई माह का वेतन भी नहीं दिया है।

एक स्थानीय अखबार के अनुसार, इस पूरे मसले को लेकर मज़दूरों ने बुधवार को रिको कार्यालय का घेराव किया, और मज़दूर संघ के नेताओं ने बातचीत के जरिए मज़दूरों को इंसाफ दिलाने की कोशिश की। लेकिन मज़दूर संघ पूरी तरह विफल रहा।

मज़दूरों को मई माह का बकाया वेतन देने और उन्हें फिर से काम पर रखने को लेकर मज़दूर संघ और कंपनी प्रबंधन के बीच करीब दो घंटे बातचीत चलती रही। कुछ समय बाद थोड़ा बहस भी हुआ।

कंपनी प्रबंधन मज़दूरों को मई माह का बकाया वेतन देने के लिए राजी हो गया लेकिन काम पर  रखने को तैयार नहीं है।

प्रबंधन के इस रवैये से मज़दूरों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। इस बात को लेकर मज़दूरों और प्रबंधन के बीच जमकर नोकझोक हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक मज़दूरों ने 17 जून को एसडीएम रामसिंह राजावत को एक पत्र लिखकर कहा था कि “यदि उन्हें काम पर दोबारा नहीं रखा गया तो उनकेे पास  सामूहिक आत्मदाह करने के सिवा कोई विक्लप नहीं बचेगा।”

बातचीत के दौरान श्रम निरीक्षक कमल चंदेलिया, रिको प्रबंधन, मज़दूर संघ के नेता सहीत और भी लोग मौजूद थे।

श्रम कानूनों के रद्द हो जाने के बाद कंपनियों को मज़दूरों का शोषण करने में आसानी हो रही है। मज़दूर संघ भी पूरी तरह विफल हो गया है।

मौजूदा बीजेपी सरकार ने तो पिछली सारी सरकारों को पीछे छोड़ते हुए 40 श्रम क़ानून ख़त्म कर दिए जबकि इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को मज़दूरों का सबसे बड़ा हितैषी घोषित करते हुए खुद को नंबर वन मज़दूर होने का दम भरते हैं।

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