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वोल्टास मज़दूरों के संघर्ष में मिली अहम जीत, प्रबंधन को 4 लाख रु जमा कराने के आदेश

नौ महीने से ग़ैरक़ानूनी गेटबंदी के ख़िलाफ़ मज़दूरों की क़ानूनी लड़ाई में लगातार पीछे जा रहा प्रबंधन

उत्तराखंड के रूद्रपुर स्थित वोल्टास कंपनी ने 25 सितम्बर 2019 को मज़दूर संघ अध्यक्ष समेत 8 मज़दूरों की अवैध तरीके से वेतन का भुगतान किए बिना गेटबंदी कर दी थी।

नौ महीने से ये मज़दूर कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। मज़दूरों के बकाया वेतन के सम्बन्ध में नैनीताल हाईकोर्ट ने 4 लाख रुपए कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया है।

इसके पहले फरवरी महीने में भी उच्च अदालत के आदेश पर प्रबंधन को तीन लाख रुपए कोर्ट में जमा करना पड़ा था।

दरअसल, मांगपत्र के विवाद के चलते वोल्टास कंपनी ने 25 सितम्बर, 2019 को यूनियन अध्यक्ष, महामंत्री सहित 8 मज़दूरों की अवैध तरीके से गेटबंदी कर दी थी, जिसके अवैध घोषित होने के बाद श्रम विभाग ने मज़दूरों के दो माह के बकाया वेतन की आरसी कटी थी।

श्रम विभाग के ख़िलाफ़ प्रबंधन उच्च न्यायालय गया था, जहाँ इस आदेश पर रोक के साथ अदालत ने 3 लाख रुपए जमा करने का आदेश दिया था। लेकिन लॉकडाउन के कारण मज़दूरों को पैसा नहीं मिल पाया है।

अभी यूनियन के लगातार प्रयास के बाद श्रम विभाग ने दो महीने के वेतन की आरसी पुनः काटी। प्रबंधन पुनः उच्च न्यायालय चला गया।

प्रबंधन के ख़िलाफ़ पहले भी जारी हुई आरसी

मेहनतकश वेबसाइट के अनुसार, वोल्टास कंपनी में, वोल्टास मज़दूर यूनियन के माँग पत्र पर 10 दिसंबर 2017 से औद्योगिक विवाद चल रहा है।

इस बीच कंपनी प्रबंधन ने मज़दूरों की अनेक सुविधाएं और वेतन में कटौतियाँ कीं, जिसके खिलाफ संघर्ष चलता रहा। प्रबंधन ने एक स्थाई श्रमिक को निलंबित किया, फिर बर्खास्त कर दिया। कई ठेका मज़दूरों को नौकरी से बेदखल कर दिया।

प्रबंधन ने 25 सितंबर 2019 को यूनियन के 8 मज़दूरों की गैरकानूनी गेट बंदी और वेतन बंदी कर दी थी, जिसे बाद में प्रबंधन ले ऑफ कहने लगा, हालांकि उसने कथित लेऑफ़ का भी कोई भुगतान नहीं किया।

विरोध के बाद श्रम विभाग द्वारा प्रबंधन के ले ऑफ को गैरकानूनी घोषित करना पड़ा।

कामबंदी गैरकानूनी घोषित होने के बाद श्रम विभाग ने 5 फरवरी को बकाया दो माह के वेतन की आरसी जारी कर दी। प्रबंधन इसके खिलाफ उच्च न्यायालय नैनीताल चला गया था।

13 फरवरी को हाईकोर्ट ने वेतन की कटी राशि से 10 दिन के भीतर 3 लाख रुपये कोर्ट में जमा करने का आदेश जारी किया।

वेतन मिलने की उम्मीद बढ़ी

लेकिन इसके ठीक अगले ही दिन 14 फरवरी को प्रबंधन ने एक नया दाँव चलते हुए कंपनी के यूनिट-2 में काम ना होने का हवाला देकर इन 8 मज़दूरों की गैरकानूनी छँटनी करते हुए सेवा समाप्ति का फरमान जारी कर दिया।

देश व्यापी लॉकडाउन के कारण पूरा मामला लटका गया है और मज़दूरों पर संकट का बादल गहरा गया है।

मज़दूरों के लाख कोशिश के बाद श्रम विभाग ने पिछले 27 मई के बाद दो महीने के वेतन की आरसी काटी, जिसके ख़िलाफ़ प्रबंधन पुनः उच्च न्यायालय चला गया।

24 जून को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में अदालत ने 10 दिन के भीतर 4 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया है।

अब कोशिश है कि कोर्ट में जमा कुल 7 लाख रुपए में से अधिकतम राशि मज़दूरों के लिए आवंटित की जाए।

वोल्टास की शुरुआत 6 सितम्बर 1954 में मुबंई से हुई थी, ये टाटा ग्रुप की कंपनी है।

(मेहनतकश डॉट इन से साभार इस ख़बर को संपादित कर प्रकाशित किया गया है।)

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