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कोरोना से भी बड़ी महामारी बना टीबी, 2019 में 26.9 लाख मामले, 20% रोगी यूपी से

2018 की तुलना में 2019 में टीबी के मामले 12% बढ़े, सबसे अव्वल उत्तर प्रदेश

कोरोना महामारी भले ही इस समय पूरी दुनिया में चिंता का विषय बनी हो लेकिन भारत के लिए टीबी कोरोना से भी बड़ी महामारी बन चुका है।

पूरी दुनियां में टीबी के मरीजों की संख्या सबसे अधिक भारत में पाई गई है। 24 जून को खुद स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि भारत में टीबी के कुल मामले 26.9 लाख हैं और इनमें भी आधे मामले पांच राज्यों में हैं जिनमें उत्तर प्रदेश 20 प्रतिशत रोगियों के साथ अव्वल है।

अन्य राज्यों में महाराष्ट्र (9%), मध्य प्रदेश (8%), राजस्थान और बिहार 7-7% हैं।

टीबी रिपोर्ट 2020 में भारत सरकार ने कहा है कि 2019 में देश में टीबी से 79,144 मौतें हुईं जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि भारत में पिछले साल 4.4 लाख मौतें हुईं।

इसी तरह दोनों के आंकड़ों में पिछले साल के मरीजो़ं की संख्या में क़रीब तीन लाख का अंतर है। क्या भारत सरकार अपनी इस नाकामी को छुपा रही है?

गौरतलब है कि चाहे कोरोना हो या अन्य कोई महामारी, मज़दूर वर्ग और ग़रीब तबका ही इसका सबसे अधिक शिकार रहा है।

जनसत्ता में छपी खबर के मुताबिक, बुधवार को प्रेस वार्ता में केंद्रीय स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और राज्य स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्री अश्वीन कुमार चौबे ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 2019 की टीबी रिपोर्ट जारी किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, टीबी के सबसे अधिक मरीज़ भारत में पाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए हर एक मामलों को ठीक से पहचानना ज़रूरी है ताकि उनका समय पर इलाज़ किया जा सके।”

टीबी संक्रमण के अधिकतर मामले सरकार की जानकारी तक नहीं पहुच पाते हैं, अब इस दुविधा से निपटने के लिए ऑनलाइन नोटिफिकेशन ‘प्रणाली’ निक्षय की शुरुआत की गई है।

निक्षय की जानकारी में नहीं आने वाले टीबी संक्रमण के मामले साल 2017 के 10 लाख से अधिक के आकड़े से घटकर केवल 2.9 लाख रह गए हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, “देश में टीबी मरीजों की पहचान करने में सरकार के प्रयास सफल रहे हैं। इसी वजह से इतने मामलों की पहचान हो पाई है।”

साल 2019 में 24 लाख मामलों की पहचान की गई थी। 2018 की तुलना में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत से अधिक है।

इन 24 लाख मामलों में से 90 प्रतिशत मामले यानी 21.6 लाख मामले नए और दोबारा टीबी होने के हैं।

इससे प्रति लाख आबादी मे 199 टीबी संक्रमण के मामलों की अनुमानित दर के मुकाबले चिन्हित मामलों की संख्या 159 मरीज प्रति लाख आबादी रही है।

इससे अनुमानित गैर चिन्हित मामलों का अंतर 40 मामले प्रति लाख आबादी रह गया है।

इन आकड़ों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि भारत में 5.4 लाख मामले अभी सरकार की जानकारी में ही नहीं हैं।

गौरतलब है डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में साल 1990 में भारत में प्रति लाख आबादी 300 टीबी संक्रमण के मामले थे, जो साल 2018 में घटकर 199 व्यक्ति प्रति लाख रह गए।

इसी तरह टीबी संक्रमण के कारण 1990 में जहां प्रति लाख आबादी में 76 मौंते होती थीं, अब घटकर 32 रह गई है।

दिवंगत भूतपूर्व वित्त मंत्री अरून जेटली ने 2018 में यूनियन बजट पेश करते समय देश के सभी टीबी मरीजों को 500 रुपए प्रति महीने देने का वादा किया था, ताकि वे बीमारी से उबरने तक अपने लिए पोषक आहार खरीद सकें और अपना यात्रा खर्च निकाल सकें।

इन प्रयासों के बाद भी देश में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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