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साहिबाबाद में अब ऑटो गियर कंपनी के 186 मजदूरों की ‘काम से छुट्टी’

मंदी का हवाला देकर अचानक जारी किया ले ऑफ नोटिस, इससे पहले एटलस ने 700 मजदूरों को बैठाया

लेऑफ के बहाने मजदूरों को नौकरी से निकालने का सिलसिला पूरे देश में तेज हो गया है, जिससे मजदूरों को कम पगार में भर्ती कर अपनी शर्तों को थोप सकें।

इसी कड़ी में उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में अब ऑटो गियर कंपनी के 186 मजदूरों की काम से छुट्टी हो गई। लॉकडाउन के बाद मंदी का हवाला देकर अचानक ले ऑफ का नोटिस जारी कर दिया गया है।

साहिबाबाद की साइट-4 स्थित ऑटो गियर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कर्मचारी रोजाना की तरह सोमवार को कंपनी पहुंचे तो सिक्योरिटी गार्ड ने गेट के अंदर ही नहीं जाने दिया। सबको बाहर चस्पा किए नोटिस को देखकर घर वापस जाने को कह दिया।

गेट पर लगे लेऑफ नोटिस में लिखा था, ‘उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1957 नियम के अंतर्गत कंपनी के 192 में से 186 कर्मचारियों को ले ऑफ नोटिस (बैठकी) दिया जा रहा है। काम बंदी के चलते मंदी का असर कंपनी की आर्थिक स्थितियों पर पड़ा है। जिसके चलते 186 कर्मचारियों को ले ऑफ नोटिस दिया गया है।

कंपनी के कर्मचारी विनोद राय ने वर्कर्स यूनिटी को बताया, ‘कंपनी में 200 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और 186 कर्मचारी स्थायी हैं।

कंपनी ने लेऑफ रविवार की शाम को ही कर दिया था, लेकिन सूचना नहीं दी। सोमवार को जब सभी कर्मचारी रोज़ाना की तरह अपने काम पर लौटे तो पता चला।

क्या वास्तव में मंदी ही कारण है लेऑफ का? नहीं, साहिबाबाद में ऑटो गियर की तीन और कंपनियां चल रही हैं, उन्हें नहीं बंद किया है, इस कंपनी को बंद करने का कारण मंदी बता रहे हैं, कंपनी प्रबंधन हमसे किसी तरह की कोई बात करने को भी राज़ी नहीं है, विनोद राय ने कहा।

हालात को देखकर मज़दूर संघ के सेक्रेटरी महेश सिंह कहते हैं ‘सरकार ने हमें पूरी तरह तोड़ दिया है। प्रशासन से भी कोई उम्मीद नहीं है हमें, वैसे भी कोई सुनवाई कहां हो रही है! एटलस को ही देख लीजिए इतनी बड़ी कंपनी ने अचानक से कर्मचारियों को लेऑफ कर सड़क पर ला दिया, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है।

श्रम विभाग से मदद नहीं लेते हैं? वो मजदूरों की नहीं, कंपनियों की सेवा कर रहे हैं। गाजियाबाद के श्रम अधिकारियों के पास समस्या लेकर जाओ तो वे कहते हैं कि मीडिया को खबर क्यों करते हो। उनका मतलब कुछ भी हो, किसी को पता न चले, बोलो मत। वर्कर्स यूनिटी के सवाल पर महेश सिंह बोले।

मज़दूर-कर्मचारी नेता कहते हैं, सरकार की सरपरस्ती में श्रम कानून खत्म से हो चुके हैं, बेखौफ होकर मजदूरों को निकालने का सिलसिला इसी वजह से चल रहा है।

ऑटो गियर कंपनी से पहले नामचीन साइकिल कंपनी एटलस ने अपने 700 कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए  बैठा दिया। एटलस प्रबंधन ने भी मंदी का हवाला दिया।

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