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उत्तराखंड के स्कूली बच्चों ने मनाया शहीदे आज़म भगत सिंह जन्मदिन

पेंटिंग और भाषण प्रतियोगिता के मार्फ़त भगत सिंह को जानने समझने की कोशिश

साइंस फॉर सोसाइटी द्वारा शहीद ए आजम भगत सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर उत्तराखंड के सुंदरखाल एवं देवीचौड़ाखत्ता में भगत सिंह के जीवन को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए भगत सिंह के चित्र में रंग भरने की प्रतियोगिता थी। कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों ने भगत सिंह के स्केच बनाए।16 वर्ष से 22 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।

कक्षा 9 से 12 के छात्रों ने भगत सिंह के जीवन से जुड़े बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दिए। बहुविकल्पी प्रश्नों के साथ एक प्रश्न कोरोना काल के दौरान बच्चों की शिक्षा से जुड़ा हुआ प्रश्न भी था।

अधिकांश छात्रों ने बताया कि उनके गांवों में बिजली नहीं है तथा सिग्नल नहीं आने के कारण वे ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं तथा जिस जूनियर स्कूल में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था वह स्कूल टिन शेड में चलाया जा रहा है। जिसमें बच्चों को पढ़ाने, की, बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।

इन प्रतियोगी कार्यक्रम में भागीदारी करने वाले सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार वितरण के लिए किसी जानी मानी हस्ती को चीफ गेस्ट बनाने की जगह गांव के प्रबुद्ध लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के हाथों से बच्चों को पुरस्कार वितरण करवाया गया।

कार्यक्रम में साइंस फार सोसायटी से संयोजक कैसर राणा ने कहा कि आज उस अमर शहीद का जन्मदिवस है जिसने एक ऐसे देश का सपना देखा था जिसमें भूख, गरीबी, अशिक्षा व बेकारी न हो।

भगत सिंह चाहते थे कि देश के मजदूर, किसानों व आम आदमी को वास्तविक रूप से बराबरी का अधिकार हासिल हो जिसमें इंसान द्वारा इंसान का शोषण न हो। उन्होंने कहा कि आज हम सभी को मिलकर भगत सिंह के इस सपने को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए।

अंत में प्रेम राम व नीमा ने ग्रामीणों व साइंस फॉर सोसायटी का इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्र में छात्रों नौजवानों के बीच वैज्ञानिक चेतना एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया।

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